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प्रेगनेंसी के तीसरे महीने के लक्षण, सावधानी और डॉक्टरी जांच!

प्रेगनेंसी के शुरुआत के महीनों में आपके शरीर में बाहरी तौर पर उतने बदलाव देखने को नहीं मिलते,जिससे आपको देख कर पता लगाया जा सके कि आप  प्रेगनेंट हैं। इस दौरान अपने खान पान और शरीर के अंदर हो रहे बदलाव को महसूस करती हैं।

प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में आपके गर्भ में पल रहे शिशु की वृद्धि होनी भी शुरू हो जाती है जिसके कारण गर्भपात या दूसरी अन्य समस्याओं का खतरा कम हो जाता है। प्रेगनेंसी के तीसरे महीने में आपको काफी सतर्क होने की जरूरत होती है।

इन सबसे जुड़ी कुछ सावधानियों को भी ध्यान में रखना आवश्यक होता है। हम उन सभी चीजों के बारे में बात करेंगे, जिनकी मदद से आप खुद के साथ साथ अपने गर्भ में पल रहे शिशु को स्वस्थ रख सकती हैं। 

गर्भावस्था के तीसरे महीने के लक्षण:

मॉर्निंग सिकनेस : गर्भावस्था  के तीसरे महीने तक मन खराब होना और उलटी जैसा एहसास चरम तक पहुंच सकता है, लेकिन महीने के अंत तक यह समस्या कम होने लगेगी। ज्यादातर गर्भवती महिलाएं पहले तिमाही के अंत तक उल्टी जैसी परेशानियों से बाहर आ जाती हैं, लेकिन कुछ महिलाओं को 7-8 महीनों तक इन दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है

थकान,पीठ दर्द और पेट दर्द :हारमोंस परिवर्तन  के कारण आपको पीठ दर्द, बढ़ते गर्भाशय में खिंचाव होने के कारण पेट के निचले भाग में दर्द महसूस होता है शरीर को गर्भ में आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति के लिए अतिरिक्त रक्त की आवश्यकता होती है, जिसके कारण गर्भवती महिला को नींद और थकान का अनुभव होता है

पैरों में ऐंठन : इस दौरान रात को सोते समय गर्भवती को पैरोंं में ऐंठन और दर्द परेशान कर सकता है। पोटैशियम और आयरन की पूर्ति न होना गर्भावस्था के दौरान ऐंठन का कारण हो सकता है।

बार-बार पेशाब आना : बढ़ता गर्भाशय मूत्राशय पर दबाव डालता है, इस कारण भी आपको बार-बार पेशाब जाने की समस्या हो सकती है

स्वभाव में बदलाव : इस दौरान आपके शरीर में होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों के कारण, आपके स्वभाव में बदलाव हो सकते हैं। ऐसे में चिड़चिड़ापन, बात-बात पर गुस्सा आना और बिना किसी कारण रोने जैसी समस्याएं स्वभाविक हैं।

मसूड़ों से खून आना : हार्मोनल स्तर में बदलाव होने से मसूड़ों की सूजन और खून आने की समस्या हो सकती है। इसके लिए आप मुंह की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

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स्ट्रेच मार्क्स दिखाई देना : गर्भावस्था के तीसरे महीने में पेट और स्तनों के बढ़ने के कारण स्ट्रेच मार्क्स भी नजर आ सकते हैं।

सूखी त्वचा और खुजली होना : हार्मोंस बदलने के चलते त्वचा सूखी पड़ सकती है, जिससे खुजली की समस्या हो सकती है। ग्लिसरीन वाला साबुन या मॉइस्चराइजर का उपयोग कर इससे राहत पाई जा सकती है।

पेट पर काली लकीर उभर आना : इस दौरान हार्मोनल बदलाव के चलते तीसरे महीने तक पेट के निचले भाग पर एक काले रंग की लकीर उभर आती है।

गर्भावस्था के तीसरे महीने में क्या खाएं?

इस दौरान बच्चे का विकास होना शुरू हो जाता है इसलिए आपकी डाइट पोषण से भरपूर होनी चाहिए। खाने में विटामिन और आयरन से भरपूर चीज़ों को शामिल करें। जंक, प्रोसेस्ड और डिब्बाबंद फूड से भी परहेज़ करें। इनसे आपकी और बच्चे दोनों की सेहत पर असर पड़ेगा।

  • विटामिन-6 से भरपूर खाद्य पदार्थ : इस महीने जी-मिचलाने की समस्या बहुत ज्यादा होती है। इसके लिए आप विटामिन-बी6 से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन करें। अंडे, हरी पत्तेदार सब्जियां आदि अपने खान-पान में शामिल करें।
  • आयरन और फोलेट : आयरन और फोलेट बहुत जरूरी हैं। इसकी कमी से शिशु में कई तरह के शारीरिक विकार होने का खतरा हो सकता है। इसके लिए चुकंदर, चीकू, ओटमील, बींस, संतरा, आलू, ब्रोकली, अंडा और हरी सब्जियां जरूर शामिल करें।
  • ताजे फलों का रस : गर्भावस्था में ताजे फलों का जूस पीना फायदेमंद होता है। यह आपको सभी जरूरी विटामिन देता है।
  • कार्बोहाइड्रेट : गर्भावस्था में कार्बोहाइड्रेट लेना जरूरी है। इसके लिए साबुत अनाज के साथ-साथ चावल व आलू अपने खान-पान में शामिल करें।
  • मीट : अगर आप मांसाहारी हैं, तो गर्भावस्था के दौरान मीट का सेवन कर सकते हैं। अच्छी तरह से पकाकर ही खाएं।
  • डेयरी उत्पाद : कैल्शियम की जरूरत शिशु के हड्डी मजबूत बनाने और आपके लिए भी जरुरी है, तो इसके लिए अपने खान-पान में डेयरी उत्पाद शामिल करें। इसके लिए दूध, दही, पनीर व घी आदि का सेवन करें।

गर्भावस्था के तीसरे महीने के दौरान डॉक्टरी जांच:

सही खान-पान, नियमित व्यायाम के साथ-साथ गर्भावस्था में नियमित रूप से डॉक्टरी जांच करवाना भी जरूरी है। जानिए, गर्भावस्था के तीसरे में महीने में कौन से जांच और स्कैन होते हैं :

  • वजन और BP जांचा जाएगा।
  • गर्भाशय के आकार का पता लगाने के लिए पेट का माप लिया जा सकता है।
  • इस महीने में आप शिशु के दिल की धड़कन सुन पाएंगी।

गर्भावस्था के तीसरे महीने में होने वाले लैब टेस्ट :

  • अगर आपके हाथ व पैरों में सूजन है, तो उसके लिए फ्लूइड रिटेंशन टेस्ट किया जाता है।
  • शुगर और प्रोटीन स्तर की जांच के लिए यूरिन टेस्ट।
  • रक्त में आरएच फैक्टर की जांच के लिए आपके रक्त का नमूना लिया जाएगा। इससे रक्त में प्रोटीन की मात्रा का पता लगाया जाता है।

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