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बिहार के स्कूलों में विकास की जगह लागू हुआ ओड इवन का फार्मूला 2

बिहार के स्कूलों में विकास की जगह लागू हुआ ओड इवन का फार्मूला

 

स्कूल में पर्याप्त व्यवस्था न होने की वजह से बिहार के जूझ रहे स्कूल ने लागू की है ओड इवन की नयी स्कीम।

दिल्ली में प्रदूषण पर काबू पाने के लिए सम-विषम फॉर्मूले को 15 दिन के लिए लागू किया गया था और अब इसी तर्ज पर बिहार के सारण जिले के एक स्कूल का प्रयोग सामने आया है।  इस जिले के एक स्कूल में पढ़ाई के लिए यह ऑड ईवन फॉर्मूला लागू है यानी एक दिन लड़के और एक दिन लड़कियों की पढ़ाई होती है।

 

स्कूल में यह नियम लागू हो चुका है। सारण जिले के बनियापुर प्रखंड के कन्हौली उच्च विद्यालय में यह व्यवस्था पिछले तीन वर्षो से जारी है। इस स्कूल में एक दिन छात्राएं और दूसरे दिन छात्र पढ़ने आते हैं।  इस स्कूल में छात्र-छात्राओं की कुल संख्या 3,281 है। इसमें उच्च विद्यालय के अलावा 11 वीं में 250 छात्रों की संख्या शामिल है, जबकि पढ़ाई के लिए मात्र 12 कमरे हैं। यहां कुल शिक्षकों की संख्या 20 है। आंकड़ों के हिसाब से एक शिक्षक पर लगभग 150 छात्रों का दायित्व है।

स्कूल के प्रधानाध्यापक श्रीप्रकाश सिंह कहते हैं ‘यहां जब से 11वीं की पढ़ाई को स्वीकृति मिली तब से लगातार भवन निर्माण और अतिरिक्त शिक्षकों की मांग की जा रही है। लेकिन अब तक कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। इस कारण मजबूरी में यह व्यवस्था लागू की गई है।’

पता नहीं बिहार सरकार लोगों को विकास की जगह हालातों से लड़ना क्यों सीखा रही है, वो तो बिहार के लोग वैसे भी करते हैं। इससे बिहार सरकार के इरादों की भनक लगाती है। पर इस नियम को लागू करने के बाद अरविन्द केजरीवाल अपनी पीठ जरूर थपथपा रहे होंगे।



लेकिन कोई चिंता की बात नहीं है, वे प्रशांत किशोर की है
प्रशांत , कौन? 2015 में नरेंद्र मोदी और 2015 में नितीश कुमार की सफलता के पीछे जिसका हाथ था , बिहार सरकार नेकैबिनेट में उन्हें अच्छी खासी जगह दे दी है 

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