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जीएसटी: सरकार ने बनाई अथॉरिटी, सस्ती हुईं चीजें महंगी बेचने वालों की खैर नहीं! 2

जीएसटी: सरकार ने बनाई अथॉरिटी, सस्ती हुईं चीजें महंगी बेचने वालों की खैर नहीं!

जीएसटी में घटी दरों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाना :

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने माल एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था के तहत राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दे दी है। इस प्राधिकरण के गठन के पीछे मकसद नई अप्रत्यक्ष कर (INDIRECT TAX) व्यवस्था में घटी दरों का लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है।

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केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, अब सिर्फ 50 वस्तुएं GST की 28 प्रतिशत के ऊंचे टैक्स स्लैब में रह गई हैं। वहीं कई वस्तुओं पर टैक्स की दर को घटाकर पांच प्रतिशत किया गया है।

देश के उपभोक्ताओं के लिए एक विश्वास :

प्रसाद ने कहा, ‘राष्ट्रीय मुनाफारोधी प्राधिकरण (Anti-Profiteering body) देश के उपभोक्ताओं के लिए एक विश्वास है। यदि किसी ग्राहक को लगता है कि उसे घटी टैक्स दर का लाभ नहीं मिल रहा है, तो वह प्राधिकरण में इसकी शिकायत कर सकता है। उन्होंने कहा कि यह सरकार की इस बारे में पूर्ण प्रतिबद्धता को दर्शाता है कि वह जीएसटी के क्रियान्वयन का पूरा लाभ आम आदमी तक पहुंचाना चाहती है।

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वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुवाई वाली जीएसटी परिषद ने पिछले सप्ताह 200 से अधिक वस्तुओं पर जीएसटी दर कम की है। इसमें 178 वस्तुओं पर जीएसटी दर को 28 प्रतिशत की श्रेणी से 18 प्रतिशत की श्रेणी में लाया गया है।

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एसी और नॉन एसी रेस्तरां पर टैक्स की दर को कम कर पांच प्रतिशत कर दिया गया। परिषद ने इससे पहले पांच सदस्यीय राष्ट्रीय मुनाफाखोरी-रोधी प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी थी।

समिति प्राधिकरण के चेयरमैन और सदस्यों के नाम तय करेगी :

कैबिनेट सचिव पी के सिन्हा की अगुवाई वाली एक समिति प्राधिकरण के चेयरमैन और सदस्यों के नाम तय करेगी। इस समिति में राजस्व सचिव हसमुख अधिया, सीबीईसी के चेयरमैन वनाजा सरना और दो राज्यों के मुख्य सचिव शामिल हैं। प्राधिकरण का कार्यकाल चेयरमैन के पद संभालने की तारीख से दो साल का होगा।

 

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चेयरमैन और चार सदस्यों की उम्र 62 साल से कम होनी चाहिए। मुनाफारोधी व्यवस्था के तहत स्थानीय प्रकृति की शिकायतों राज्य स्तर की जांच समिति को भेजी जाएंगी। वहीं राष्ट्रीय स्तर की शिकायतें स्थाई समिति को भेजी जाएंगी।

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यदि प्राधिकरण को लगता है कि किसी कंपनी ने जीएसटी का लाभ ग्राहक को नहीं दिया है, तो उसे यह लाभ उपभोक्ताओं को देने को कहा जाएगा। यदि उपभोक्ताओं की पहचान नहीं हो पाती है, तो कंपनी को यह राशि एक निश्चित समय में ग्राहक कल्याण कोष में स्थानांतरित करनी होगी।

 

 

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