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IAS STORY

IAS Success Story: कैसे अरनव मिश्रा IAS अफसर से कुछ दिनों में ही SDM बन गए !

IAS Success Story:

वो कहते हैं न मेहनत का फल आपको मिलता ही है। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स की  IAS success story  के बारे में बता रहे हैं, जो अब अफसर बन गए हैं।जी हाँ हम बात कर रहे हैं, अरनव मिश्रा की। अरनव मिश्रा ने यूपीएससी और पीसीएस का भी एग्जाम दिया था। यूपीएससी में उनका नाम पहली लिस्ट में नहीं आया लेकिन जब दूसरी लिस्ट आई तो वह IAS अफसर बन गए। UPSC का रिजल्ट आने के 9 दिन बाद आया पीसीएस का रिजल्ट और इसमें अरनव की 16वीं रैंक आई और एसडीएम बन गए। दो एग्जाम की तैयारी लाई रंग।

अर्नव मिश्रा UPSC टॉपर की उम्र 28 साल है। एक या दो बार नहीं, बल्कि कई बार उन्होंने इसका परिणाम देखा। घर लाए हुए प्रवेश पत्र की जांच की। नाम के हर अक्षर और रोल नंबर का मिलान किया। वह सुनिश्चित करना चाहता था कि उसका नाम परिणामों में दिखाई दे। फिर पुष्टि के बाद माता-पिता को फोन करें। यह उनके एक अद्भुत अनुभूति थी।

आईआईटी जोधपुर से इंजीनियरिंग करने के बाद नौकरी भी की:

आईआईटी जोधपुर से इंजीनियरिंग करने के बाद अरनव ने कुछ समय नौकरी भी की। इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने के उद्देश्य से सिविल सेवा परीक्षा देने की तैयारी की। आईएफएस की अधिकारी उनकी बड़ी बहन आरुषि मिश्रा का बहुत योगदान है। अर्णव ने बताया कि कड़ी मेहनत, लगन और परिवार के माहौल की मदद से उन्होंने अपना टारगेट हासिल किया है।

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उपलब्धि का श्रेय माता-पिता,बड़ी बहन-बहनोई और गुरु को दिया:

अर्णव के प्रोफेसरों के अनुसार, दोनों भाई-बहन अच्छे छात्र थे जो आमतौर पर कक्षा में अच्छे नंबर लाते थे। दूसरी ओर, अर्नव का दावा है कि इस लक्ष्य को हासिल करना सरल नहीं था, लेकिन कड़ी मेहनत और सहायक पारिवारिक माहौल की बदौलत इसे हासिल किया जा सका।

arnav mishra success story

अर्नव ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माता-पिता के अलावा अपनी बड़ी बहन और बहनोई को दिया है। क्योंकि उन्हें अपने गुरु से बहुत सहायता मिली। अर्णव की बहन आरुषि मिश्रा का चयन आईएफएस, भारतीय वन सेवा और उत्तर प्रदेश लोक सेवा के लिए हुआ था।

आरुषि के पति प्रतिष्ठित गौड़ उत्तर प्रदेश कैडर के लिए काम करते हैं। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2019 में आरुषि को 229वीं रैंक मिली थी।अरनव मिश्रा के परीवार में अधिकांश लोग अधिकारी रैंक के हैं। अरनव उन अभ्यर्थियों के लिए मिशाल हैं जो एक साथ 2 परीक्षाओं की मन से तैयारी करते हैं। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने साबित कर दिया कि कोई भी काम कठिन नहीं है।

कितने घंटे पढ़ाई कर के बने SDM:

हर दिन 8 से 10 घंटे पढ़ने की कोशिश करता था। लेकिन आपको अपनी क्षमता और समझ के अनुसार पढ़ना होगा। उनका कहना है कि उन्होंने ऐसे लोगों को भी देखा है जिन्होंने बहुत कम समय में पढ़कर भी अच्छे रैंक प्राप्त किए।

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