आँवला एक फल देने वाला वृक्ष है। संस्कृत में इसे अमृता, अमृतफल, आमलकी, पंचरसा इत्यादि, अंग्रेजी में ‘एँब्लिक माइरीबालन’ या इण्डियन गूजबेरी (Indian gooseberry) तथा लैटिन में ‘फ़िलैंथस एँबेलिका’ (Phyllanthus emblica) कहते हैं। यह वृक्ष समस्त भारत में जंगलों तथा बाग-बगीचों में होता है। आयुर्वेद के अनुसार हरीतकी (हड़) और आँवला दो सर्वोत्कृष्ट औषधियाँ हैं। इन दोनों में आँवले का महत्व अधिक है। चरक के मत से शारीरिक अवनति को रोकनेवाले अवस्थास्थापक द्रव्यों में आँवला सबसे प्रधान है। प्राचीन ग्रंथकारों ने इसको शिवा (कल्याणकारी), वयस्था (अवस्था को बनाए रखनेवाला) तथा धात्री (माता के समान रक्षा करनेवाला) कहा है।

आयुर्वेद में आंवला का महत्त्व-

आयुर्वेद में आंवला को अत्यधिक स्वास्थ्यवर्धक माना गया है। आँवला विटामिन ‘सी’ का सर्वोत्तम और प्राकृतिक स्रोत है। इसमें विद्यमान विटामिन ‘सी’ नष्ट नहीं होता। यह भारी, रुखा, शीत, अम्ल रस प्रधान, लवण रस छोड़कर शेष पाँचों रस वाला, विपाक में मधुर, रक्तपित्त व प्रमेह को हरने वाला, अत्यधिक धातुवर्द्धक और रसायन है। यह ‘विटामिन सी’ का सर्वोत्तम भण्डार है। आँवला दाह, पाण्डु, रक्तपित्त, अरुचि, त्रिदोष, दमा, खाँसी, श्वास रोग, कब्ज, क्षय, छाती के रोग, हृदय रोग, मूत्र विकार आदि अनेक रोगों को नष्ट करने की शक्ति रखता है। वीर्य को पुष्ट करके पौरुष बढ़ाता है, चर्बी घटाकर मोटापा दूर करता है। सिर के केशों को काले, लम्बे व घने रखता है। विटामिन सी ऐसा नाजुक तत्व होता है जो गर्मी के प्रभाव से नष्ट हो जाता है, लेकिन आँवले में विद्यमान विटामिन सी कभी नष्ट नहीं होता। हिन्दू मान्यता में आँवले के फल के साथ आँवले का पेड़ भी पूजनीय है । माना जाता है कि आँवले का फल भगवान विष्णु को बहुत पसंद है इसीलिए अगर आँवले के पेड़ के नीचे भोजन पका कर खाया जाये तो सारे रोग दूर हो जाते हैं।

आंवला के रासायनिक संघटन-

आँवले के 100 ग्राम रस में 921 मि.ग्रा. और गूदे में 720 मि.ग्रा. विटामिन सी पाया जाता है। आर्द्रता 81.2, प्रोटीन 0.5, वसा 0.1, खनिज द्रव्य 0.7, कार्बोहाइड्रेट्स 14.1, कैल्शियम 0.05, फॉस्फोरस 0.02, प्रतिशत, लौह 1.2 मि.ग्रा., निकोटिनिक एसिड 0.2 मि.ग्रा. पाए जाते हैं। इसके अलावा इसमें गैलिक एसिड, टैनिक एसिड, शर्करा (ग्लूकोज), अलब्यूमिन, काष्ठौज आदि तत्व भी पाए जाते हैं।

आंवला का उपयोग-

त्रिफला की 3 औषधियों में से आंवला एक है। इसे सूखे चूर्ण के रूप में अन्य औषधियों के साथ नुस्खे के रूप में और अचार, चटनी, मुरब्बे के रूप में सेवन किया जाता है। च्यवनप्राश, ब्राह्मरसायन, धात्री लौह और धात्री रसायन आदि आयुर्वेदिक योग तैयार करने में आंवला काम आता है। यह अनेक रोगों को नष्ट करने वाला पोषक, धातुवर्द्धक और रसायन है। आयुर्वेद ने इसे ‘अमृतफल’ कहा है।
विटामिन सी ऐसा नाजुक तत्व होता है जो गर्मी के प्रभाव से नष्ट हो जाता है, लेकिन मजे की बात यह है कि आंवला में विद्यमान विटामिन सी किसी भी सूरत में नष्ट नहीं होता। यह सदाबहार फल सभी ऋतुओं में चटनी, मुरब्बा, अचार, चूर्ण, अवलेह आदि के रूप में गुणकारी बना रह सकता है।

आँखों के लिए फायदेमंद है आंवला:

आंवला आँखों के लिए बहुत फायदेमंद हैं। आंवला का नियमित सेवन करने से आँखों की रौशनी में बृद्धि होती है। जिन लोगों को  मोतियाबिंद , कलर ब्लाइंडनेस, रतोंधी या कम दिखाई पड़ता हो उनके लिए आंवले का जूस अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। आंवले के जूस में थोड़ा शहद मिलाकर पीने से ये आँखों की सभी बीमारियों को दूर कर सकता है।

मधुमेह रोगियों के लिए आंवले के लाभ:

आवला में क्रोमियम तत्व पाया जाता हैं जो डायबिटिक के उपयोगी होता हैं। आवला इंसुलिन होरमोंस को को सुदृढ़ करता हैं और खून में सुगर की मात्रा को नियंत्रित करता हैं। क्रोमियम बीटा ब्लॉकर के प्रभाव को कम करता हैं, जो की ह्रदय के लिए अच्छा होता हैं और ह्रदय को स्वस्थ बनाता हैं। आवला खराब कोलेस्ट्रोल को ख़त्म कर अच्छे कोलेस्ट्रोल को बनाने में मदद करता हैं। आवला के रस में शहद मिलाकर लेने से डायबिटिक वालोन को बहुत फायदा होता हैं।
आंवला को आप मुरर्बा बनाकर, सुखाकर, जूस निकालकर, कच्चा या किसी भी रूप में ले सकते हैं।

ह्रदय सम्बंधित समस्याओं के लिए आंवला का उपयोग:

आवला हमारे ह्रदय के मांसपेशियों के लिए उत्तम होता हैं। आंवला हमारे ह्रदय को स्वस्थ बनाये रखने में मददगार साबित होता है।  आंवला हमारे ह्रदय की नालिकाओ में होने वाली रुकावट को ख़त्म करता हैं तथा खराब कोलेस्ट्रॉल को ख़त्म कर अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बनाने में मदद करता हैं। आवला में एंटी ऑक्सीडेंट तत्व प्रचुर मात्रा में पाया जाता हैं, जो शरीर में फ्री रेडिकल को बनाने ही नहीं देता .एंटी ऑक्सीडेंट के रूप में एमिनो एसिड और पेक्टिन पाए जाते हैं, जो की कोलेस्ट्रॉल को नहीं बनाने देता हैं और ह्रदय की मांशपेशियों को मजबूती देता हैं।

प्रजनन सम्बन्धी समस्याओं में फायदेमंद है आंवला का सेवन:

आंवला प्रजनन के लिए बहुत ही उत्तम हैं महिलाओ और पुरुषो के लिए आंवला के सेवन से पुरुषो में शुक्राणु की क्रियाशीलता और मात्रा बढती हैं और महिलाओं में अंडाणु अच्छे और स्वस्थ बनते हैं। आंवले का सेवन महिलायों में माहवारी सम्बंधित समस्याओं को दूर करता है। आंवला में मौजूद मिनरल्स एवं विटामिन महिलाओं की इस समस्या को दूर करते है और महिलाओं को होने वाली बेचैनी को दूर करते है। इसलिए महिलाओं को आंवले का सेवन रोज करना चाहिए।

संक्रमण से बचाता है आंवला:

आंवला में बैक्टीरिया और फंगस से लड़ने की क्षमता होती हैं और ये बाहरी बीमारियों से भी हमें बचाता हैं।  आंवला का सेवन शरीर को पुष्ट बनाता है तथा रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता हैं।  आंवले के नियमित से हमारे शरीर से विषाक्त प्रदार्थ बाहर निकल जाते हैं। आंवला अल्सर, अल्सरेटिव, कोलेटीस, पेट में संक्रमण जैसे विकार को खत्म करता हैं।

नकसीर रोगियों के लिए फायदेमंद है आंवला :

अगर किसी व्यक्ति को नकसीर की समस्या हैं तो उसे आवला का सेवन करने से बहुत फायदा होता हैं। आंवले का ताज़ा रस ३ ,४ चम्मच का सेवन करना चाहिए, या १ ग्राम चूर्ण  को ५० मिग्रा. पानी के साथ लेना चाहिए। नाक से खून आने की समस्या से आराम मिलता है।

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आंवला एक रामबाण फल है जिसके सेवन से हम कई बीमारियों से छुटकारा पा सकते हैं। आंवला का सेवन हम ताज़ा और सुखा आवला चूर्ण दोनों ही रूप में कर सकते हैं।  आंवला बसंत के मौसम में फलते हैं। आंवला का उपयोग सदियों से चला आ रहा हैं।  सबसे पहले चरक ऋषि ने इसकी महत्ता बताई थी।  आंवले  के उपयोग से हम हमेशा जवान और सुंदर व स्वस्थ शरीर वाले बने रह सकते हैं। आंवला सभी रोगों के लिए अचूक औषधि हैं।  इसलिए आज से ही आंवले का नियमित सेवन करना शुरू कर दीजिये।

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