भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित हिंदुओं का प्रसिद्ध मंदिर है केदारनाथ। उत्तराखंड में हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मंदिर 12 ज्योतिर्लिंग में से एक है। यह मंदिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्य ही दर्शन के लिए खुलता है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण पांडवों के पौत्र महाराजा जनमेजय ने कराया था और आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया।
यह मंदिर एक 6 फुट ऊंचे चौकोर चबूतरे पर बना हुआ है। मंदिर में मुख्य भाग मंडप और गर्भगृह के चारों ओर प्रदक्षिणा पथ है। बाहर प्रांगण में नंदी बैल वाहन के रूप में विराजमान हैं।
उत्तराखंड त्रासदी में ऐसे हुआ चमत्कार:
जून 2013 के दौरान भारत के उत्तराखंड में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण केदारनाथ सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा केदारनाथ के साधुओं ने आँखों देखा हाल बताया, सैलाब के साथ एक विशाल चट्टान नीचे आ रही थी। उसको देखकर लगा था कि अब मंदिर के भीतर के मौजूद 300-400 लोगों का बचना भी मुश्किल है।
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लेकिन अचानक वह चट्टान मंदिर पर गिरने के बजाय उससे लगभग 50 फीट की दूरी पर गिर कर ही रह गई। अचानक चट्टान का रुकना किसी चमत्कार से कम न था। माना जाता है कि इस चट्टान ने ही मंदिर की रक्षा की जिससे मंदिर को नुकसान होने से बच गया। मंदिर के आसपास का इलाका पूरी तरह तबाह हो गया लेकिन इस ऐतिहासिक मंदिर का मुख्य हिस्सा एवं सदियों पुराना गुंबद सुरक्षित रहे।
जीवनमुक्ति की प्राप्ति:
उत्तराखंड में बद्रीनाथ और केदारनाथ दोनों के दर्शनों का बड़ा ही महत्व है। केदारनाथ के संबंध में लिखा है कि जो व्यक्ति केदारनाथ के दर्शन किए बिना बद्रीनाथ की यात्रा करता है उसके यात्रा निष्फल मानी जाती है और केदारनाथ सहित नर नारायण मूर्ति के दर्शन का फल समस्त पापों के नाश और जीवनमुक्ति की प्राप्ति बतलाया गया है।
दर्शन का समय:
केदारनाथ जी का मंदिर दर्शनार्थियों के लिए प्रातः 6:00 बजे खुलता है फिर दोपहर 3:00 से 5:00 तक विशेष पूजा होती है उसके बाद मंदिर बंद कर दिया जाता है उन्हें शाम 5:00 बजे जनता के दर्शन हेतु मंदिर खोला जाता है पांच मुख वाले भगवान शिव के प्रतिमा का विधिवत श्रृंगार करके 7:30 से 8:30 बजे तक नियमित आरती होती है रात्रि 8:30 बजे केदारेश्वर ज्योतिर्लिंग का मंदिर बंद कर दिया जाता है।
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केदारनाथ से बद्रीनाथ का सफ़र:
केदारनाथ से बद्रीनाथ की दूरी लगभग 315 किलोमीटर की दूरी में केदारनाथ से गौरीकुंड का 18 किलोमीटर का पैदल ट्रैक भी शामिल है। गौरीकुंड से 5 किलोमीटर की दूरी पर सोनप्रयाग एक जगह है जहां सभी वाहनों का पार्किंग होती है।
केदारनाथ से बद्रीनाथ की सड़क मार्ग दूरी तय करने में लगभग 7 से 8 घंटे का समय लग जाता है केदारनाथ से बद्रीनाथ जाने के दो सड़क मार्ग बद्रीनाथ जाने के लिए केदारनाथ के पास फाटा, गुप्तकाशी या सिरसी हेलिपैड से हेलीकाप्टर भी बुक किया जा सकता है।