पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत एपीजे अब्दुल कलाम हमेशा से ही एक शिक्षक के रूप में याद किये जाना चाहते थे। नियति ने उनकी इच्छा का पूरा सम्मान किया और आईआईएम शिलॉग में वह छात्रों के बीच लेक्चर देते हुए ही इस दुनिया से रुखसत हुए।

अटल जी ने फोन करके कलाम साहब को मंत्रीमंडल में शामिल होने का न्योता दिया अब्दुल कलाम देश के राष्ट्रपति बनने के बाद भी कभी भी एक राजनेता के रूप मे नहीं याद किये जायेंगे। कलाम साहब को 1998 मे तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कैबिनेट में शामिल होने का न्योता दिया था।

अटल जी ने कलाम साहब को फोन करके 15 मार्च 1998 में आधी रात को फोन करके मंत्रीमंडल में शामिल होने का न्योता दिया। अटल जी ने फोन करके कहा कि वह मंत्रीमंडल की सूची को आखिरी रूप में दे रहे हैं और वह चाहते हैं कि आप मंत्रीमंडल का हिस्सा बनें।

रात को 3 बजे अपने दोस्तों संग की प्रस्ताव पर चर्चा

कलाम साहब ने अटल जी इस बारे में सोचने का समय मांगा, जिसके बाद अटल जी ने उनसे सुबह नौ बजे मिलने को कहा। लेकिन कलाम साहब ने उसी रात अपने कुछ करीबी दोस्तो को इस बारे में चर्चा के लिए बुलाया जिसके बाद देर रात तीन बजे तक उन्होंने इस विषय पर अपने मित्रों से चर्चा की।

राष्ट्रीय हित के प्रोजेक्ट्स से जुड़े होने के चलते किया इनकार

दोस्तों के साथ विचार-विमर्श में यह सहमति बनी कि कलाम साहब राष्ट्रीय मह्त्व के दो प्रोजेक्ट्स से जुड़े हुए हैं ऐसे में इन प्रोजेक्ट्स को बीच में छोड़ना सही नहीं होगा। जिसके बाद अगले दिन सुबह सात बजे कलाम साहब अटल जी के निवास सफदरगंज रोड पहुंचे और उन्होंने अनपी स्थिति को साफ करते हुए मंत्रीमंडल में शामिल होने से इनकार कर दिया।

कलाम साहब अटल जी को बताया कि वह इस समय अग्नि मिसाइल और परमाणु ऊर्जा के कार्यक्रम के साथ जुड़े हैं। ऐसे में यह मुमकि नहीं होगा कि इन प्रोजेक्ट्स को बीच में छोड़कर मंत्रीमंडल में शामिल हो सके। एपीजे अब्दुल कलाम ने यह तथ्य अपनी पुस्तक टर्निंग प्वाइंट- ए जर्नी थ्रू चैलैंज में इस बात का खुलासा किया है।

Source – One India

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