भारत में मौजूद कुछ आध्यात्मिक दुर्गम यात्राएँ जो आपको सत्य और स्वयं के पास लाती हैं !

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भारत में कुछ जगहें हैं जो आपको शांति, सुकून और ईश्वरी आनंद की अनुभूति करवाती हैं! आइए जानें इन्हें ...

आसान नए-नए यात्रीओं के लिए है चार धाम यात्रा |  इसमें आसान से मुश्किल हैं :  बद्रीनाथ  गंगोत्री   यमुनोत्री    केदारनाथ 

बद्रीनाथ धाम वैसे तो बहुत ऊंचाई पर है और कठिन चढ़ाई और दुर्गम क्षेत्र पर स्तिथ है लेकिन भारतीय सेना ने यहां तक सड़क बना रखी है जिसपर गाड़ी धाम तक चलती हैं !

सरकार ने भी पर्यटन की दृष्टि से इसे विकसित करना शुरू कर दिया है और एक बड़ा प्रोजेक्ट इसकी काया-पलट करने में लगा दिया है!

गंगोत्री तक की यात्रा भी आप गाडी से करते हो, केवल गंगोत्री से गोमुख ग्लेश्यिर तक जाने के लिए १४ km की दुर्गम चढ़ाई यात्रा/ट्रेक है जो आप कैंपिंग के साथ ४ दिन में पूरी कर सकते हो ->

गंगोत्री से गोमुख 

ट्रेक का पहला दिन :  गंगोत्री से भोजबासा (camping) दूसरा दिन : भोजबासा से तपोवन(कैंपिंग) + गौमुख  तीसरा दिन: तापवान से भोजबासा चौथा दिन : भोजबासा से गंगोत्री   

गंगोत्री-भोजबासा-तपोवन  

यमुनोत्री ट्रेक जानकी चट्टी से शुरू होता है और झरनों, पहाड़ों और जंगलों के सुंदर दृश्यों से होकर गुजरता है। यह ट्रेक चुनौतीपूर्ण है और इसके लिए अच्छे स्तर की फिटनेस और तैयारी की आवश्यकता होती है। 

यमुनोत्री धाम

यमुनोत्री यात्रा कार्यक्रम दिन 1:  देहरादून से जानकी चट्टी (220 किमी) 7-8 घंटे. दिन 2:  जानकी चट्टी से यमुनोत्री (6 किमी) 4-5 घंटे दिन 3:  यमुनोत्री से जानकी चट्टी (6 किमी) 3-4 घंटे. दिन 4:  जानकी चट्टी से देहरादून (220 किमी)

यमुनोत्री यात्रा 

पारंपरिक ट्रैकिंग मार्ग गौरीकुंड से शुरू होता है और लगभग 16 किमी लंबा है, जो सुंदर हिमालयी परिदृश्य और गांवों से होकर गुजरता है। मंदिर तक पैदल यात्रा करने के लिए आपको उत्तराखंड वन विभाग से परमिट प्राप्त करना होगा। मंदिर परिसर में गेस्टहाउस, लॉज, कैंपसाइट और बुनियादी आवास सुविधाओं में आवास उपलब्ध है। यहां घूमने का सबसे अच्छा समय मई से जून और सितंबर से अक्टूबर है।

केदारनाथ धाम 

नई दिल्ली से हरिद्वार 206 किमी >> हरिद्वार से ऋषिकेश 24 किमी >> ऋषिकेश से देवप्रयाग 74 किमी >> देवप्रयाग से श्रीनगर 34 किमी >> श्रीनगर से रुद्रप्रयाग 33 किमी >> रुद्रप्रयाग से गौरीकुंड (तिलवाड़ा-अगस्तमुनि-चंद्रपुरी होते हुए >> कुंड >> गुप्तकाशी >> फाटा >>सीतापुर >> सोनप्रयाग) 74 किमी >> गौरीकुंड से केदारनाथ (ट्रेक द्वारा) 18 किमी।

केदारनाथ यात्रा १  

> सोनप्रयाग से साझा टैक्सी के माध्यम से गौरीकुंड (लगभग 6 किमी) पहुँचें > रामबाड़ा पुल के माध्यम से गौरीकुंड से जंगल चट्टी (6 किमी) > जंगल चट्टी से भीमबली (4 किमी) भीमबली से लिंचौली (3 किमी) > लिंचौली से केदारनाथ बेस कैंप (4 किमी) > केदारनाथ बेस कैंप से केदारनाथ मंदिर (1 किमी)

केदारनाथ यात्रा २

ये एक लम्बा ट्रेक है जिसमें लोगो की हिम्मत और शक्ति कई बार टूटती है, अगर आपमें हिम्मत और दृढ-संकल्प नहीं है तो आप कई बार घोड़े-ख़च्चर या पालकी का सहारा ढूंढोगे ! पर असली आनंद और संतोष स्वयं चल कर जाने में ही आएगा!  नोट: अगर आपका स्वास्थ्य अच्छा नहीं है या कोई अंग साथ नहीं दे रहा या ह्रदय रोग है तो पैदल न जाएँ! खच्चर, पालकी या हेलीकाप्टर से जाएँ !

जय बाबा केदारनाथ

इस स्टोरी का पार्ट-२ यानि दूसरा भाग भी जल्द लाएंगे 

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