दूसरे क्षेत्रों की तरह रेलवे में भी लगाएं पैसेः सुरेश प्रभु


लगता है निवेशक इंडियन रेलवे में पैसा लगाना नहीं चाहते। तभी तो रेल मंत्री सुरेश प्रभु को विदेशी फंडों और घरेलू निवेशकों से दूरसंचार, ऊर्जा और सड़क क्षेत्रों में निवेश की मिली सफलता की दुहाई देनी पड़ी। दरअसल, गुरुवार को निवेशकों के साथ बैठक में रेल मंत्री का दर्द छलक पड़ा।

उन्होंने बैठक में शामिल निवेशकों से कहा कि उन्होंने कई क्षेत्रों में निवेश किया, लेकिन रेलवे में कभी नहीं। प्रभु ने कहा कि रेलवे को इस साल फंडों में दस खरब रुपये और अगले पांच साल में 8.5 ट्रिलियन रुपये (यानी 85 खरब रुपये) की जरूरत होगी।

बीमाकर्ता और वित्तीय संस्थाओं की अगुवाई में विदेशी निवेश बैंकरों और घरेलू निवेशकों की बैठक में प्रभु ने कहा, ‘आपने दूरसंचार, ऊर्जा और सड़क क्षेत्र में सफलतापूर्वक निवेश किया है लेकिन रेलवे में कभी निवेश नहीं किया।’ उन्होंने कहा, ‘सरकार ने भी पिछले दो दशक में निवेश नहीं किया और इसलिए हमने पांच साल की एक योजना बनायी है जिसके अंतर्गत हमारी इस वित्त वर्ष में एक ट्रिलियन रुपये और अगले पांच साल में 8.5 ट्रिलियन रुपये के निवेश पर नजर है।’

सूत्रों ने बताया कि बीएसई टावर में शाम में बंद कमरे में हुई बैठक में प्रभु ने विदेशी फंड और बहुराष्ट्रीय निवेश-बैंकरों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) और एलआईसी जैसी घरेलू बीमाकर्ता तथा अन्य वित्तीय संस्थानों सहित घरेलू निवेशकों का निवेश के लिए स्वागत किया। हालांकि, मंत्री ने फौरन स्वीकार किया कि रेलवे जैसी सार्वजनिक सेवा में निजी निवेश आने में समय लगेगा।

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