महिला दिवस विशेष: मिलिए पुरुषों का काम करने वाली महिला राज मिस्त्री मीना से


आपने शायद अब तक राज मिस्त्री का काम करते पुरुषों को ही देखा होगा, लेकिन इस प्रफेशन में भी महिलाएं खुशी-खुशी आने लगी हैं। एक ऐसी ही महिला हैं मीना अहिरवार, जो घर से बाहर मकान बनवाती हैं, कंस्ट्रक्शन साइटों पर सुपरवाइजर का काम करती हैं। इन दिनों मीना उस कंट्रक्शन टीम का हिस्सा हैं , जो हरि नगर में तिमंजिला इमारत बना रही है। सफाई से ईंट के ऊपर ईंट रखने, ईटों के बीच में समान गैप रखने का काम करने के साथ-साथ वह अपने साथ काम करने वाले अन्य कामगारों पर भी नजर रखती हैं।

साइट पर उनका कॉन्फिडेंस बताता है कि वह इस काम में किसी पुरुष से कम नहीं हैं। मिस्त्री के काम को स्किल्ड लेबर के तहत रखा जाता है और इसके लिए ज्यादा मजदूरी मिलती है। मिस्त्रियों की लिस्ट में राज मिस्त्री का दर्जा सबसे ऊपर होता है, जहां ज्यादातर पुरुष ही दिखाई देते हैं। ऐसे में मीना के लिए यहां तक पुंचना आसान नहीं था। पहले वह हेल्पर का काम करती थीं, जो काम आमतौर पर महिलाएं ही करती हैं। आज मीना एक प्रशिक्षित मिस्त्री हैं।

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मीना की यह कहानी 7 साल पहले शुरू हुई, जब उन्होंने अपने पति से कहा कि वह भी उनकी तरह राज मिस्त्री बनना चाहती हैं ताकि कमाई ज्यादा हो और वह अपने 5 बच्चों को अच्छी शिक्षा दे सकें। मीना कहती हैं, ‘मेरी बात सुनकर वह हैरान जरूर हुए लेकिन मना नहीं किया और कहा कि कर सकती हो तो करो।’ उसके बाद मीना अपने पति की राह पर चल पड़ीं और आज एक कुशल राज मिस्त्री हैं। मीना हरि नगर में रहती हैं।

वह बताती हैं, जब मैंने यह काम शुरू किया तो यहां की झुग्गियों में रहने वाले लोग मुझपर हंसते थे, मजाक उड़ाते थे। उन्होंने कहा, ‘लोग कहते थे कि यह पुरुषों को काम है, महिलाओं का नहीं, तो मैं कहती थी- मैं अपने बच्चों के भविष्य के लिए यह काम कर रही हूं।’ सिर पर दुपट्टा और चेहरे पर मुस्कान लिए उन्होंने अपना काम थोड़ी देर के लिे रोककर हमसे बात की और कहने लगीं, ‘हम करीब 20 साल पहले शहर आए थे, क्योंकि कम बारिश की वजह से मध्यप्रदेश में हमारे गांव में खेती करना मुश्किल हो रहा था।’ मीना पहले हेल्पर का काम करती थीं, आज वह बतौर राज मिस्त्री रोजाना 800 रुपये कमा लेती हैं। अगर मीना के पति साइट पर नहीं होते तो वह उनका काम भी संभाल लेती हैं।

मीना ने बताया कि राज मिस्त्री का काम उन्होंने अपने पति को देख-देखकर सीखा। आज वह ठेकेदार के साथ कंस्ट्रक्शन से जुड़े फैसले भी लेती हैं। वह कहती हैं, ‘यह औरत-मर्द की बात नहीं है बल्कि काम की क्वॉलिटी है जो सामने वाले का विश्वास जीतती है।’ एक अंडर-कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग में एक फ्लैट के मालिक बलबीर सिंह कहते हैं, ‘मीना के पति प्यारेलाल ने मुझे काम की शुरुआत के साथ मीना से मुझे मिलवाया और बताया कि राज मिस्त्री का काम मीना करेंगी। हम हैरान रह गए थे, लेकिन जब हमने काम की क्वॉलिटी देखी तो खुश हो गए। अब जब हम री-कंस्ट्रक्शन का काम करवा रहे हैं तो मीना ही सुपरवाइजर का काम कर रही हैं।’

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मीना की तरह हरि नगर से कुछ किलोमीटर दूर बक्करवाला जेजे कॉलोनी की रुक्साना भी पुरुषों को चुनौती दे रही हैं। वह बेहद गर्व से हाउस पेंटर का बैज लगाकर घरों में रंगाई-पुताई का काम करती हैं। वह रंगाई के ठेके लेती हैं और बिना झिझक के यह काम करती हैं। 2004 में रुक्साना 60 रुपये की दिहाड़ी पर मजदूरी पर लेबर का काम करती थीं, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि पेंट करने के काम में ज्यादा पैसा है। इसके बाद उन्होंने यह काम शुरू किया और ऊंचाई पर चढ़-चढ़कर पेंट करने के खतरे के बावजूद उन्होंने परिवार के लिए इस काम को करने की ठानी। रुक्साना 3 बच्चों की मां हैं।

वहीं, 33 साल की कलावती यादव को अब भी अच्छी मिस्त्री के रूप में स्वीकारे जाने का इंतजार है। उनके पास सरकारी स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम के दो-दो सर्टिफिकिट हैं, लेकिन पुरुष मिस्त्रियों के बीच वह अपनी पहचान बनानो के लिए कोशिशों में जुटी हुई हैं। उन्होंने बताया कि वह मिस्त्री की तरह कंस्ट्रक्शन साइट पर पहुंचती हैं, लेकिन ज्यादातर उन्हें हेल्पर की तरह काम कर लौटना पड़ता है।

Source: NBT


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