आज महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं हैं। महिलाएं अब हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। 8 मार्च को पूरी दुनिया में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर हम आपको भारत की उन 5 बेटियों के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने मुश्किलों से लड़ते हुए खुद का लोहा मनवाया।

1-  अरुणा बी रेड्डी

ये कहानी है हैदराबाद की रहने वाली अरुणा बी रेड्डी की। जी हाँ अरुणा बी रेड्डी ने वो कर दिखाया, जो देश में अभी तक कोई नहीं कर पाया था। अरुणा रेड्डी जिम्नास्टिक्स वर्ल्ड कप में व्यक्तिगत पदक जीतने वाली पहली भारतीय जिम्नास्ट बनीं। उन्होंने यह खिताब महिलाओं की वॉल्ट इवेंट में कांस्य पदक अपने नाम करने के बाद हासिल किया।

आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि अरुणा जिम्नास्टिक्स के अलावा कराटे की भी माहिर खिलाड़ी हैं. इन्हें कराटे में भी ब्लैक बेल्ट हासिल है. हालांकि अरुणा की शुरुआत अच्छी नहीं रही. अरुणा को अपने पिता से बेहद लगाव था. उन्हीं के कहने पर अरुणा ने 2002 में कराटे के साथ जिम्नास्टिक्स सीखने की शुरुआत की थी. अरुणा को जिम्नास्टिक्स से प्यार हो गया वे मेहनत कर रही थीं लेकिन 2010 में उनके पिता का देहान्त हो गया. अरुणा ने हार नहीं मानी और जिम्नास्टिक्स में वो कर दिखाया जो अब तक कोई भारतीय नहीं कर सका था।

aruna reddy

2-  श्रद्धा भंसाली

ये कहानी है मुंबई की रहने वाली श्रद्धा भंसाली की। जी हाँ श्रद्धा की पढ़ाई-लिखाई हुई विदेश में लेकिन काम कर रही हैं भारत में। श्रद्धा ने विदेश में अपनी नौकरी छोड़कर एक वेजीटेरियन रेस्टोरंट खोला है. खास बात ये है कि जो सब्जियां इस रेस्टोरेंट में पकाई जाती हैं, वे इसी रेस्टोरेंट में उगाई भी जाती हैं. इसमें छत पर पिपरमेंट और थाइलैंड ग्रास उगाई जाती है.

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रेस्टोरेंट में भारतीय व्यंजन के अलावा चाइनीज, इटैलियन और थाई वेज व्यंजन भी दिए जाते हैं. श्रद्धा ने फूड एंड हॉस्पिटेलिटी की स्टडी की है, जिसकी वजह से वो इसे ज्यादा अच्छे तरीके से चला पा रही है. हाल ही में फोर्ब्स मैगजीन ने ’30 अंडर 30′ की लिस्ट जारी की थी, जिसमें श्रद्धा भंसाली का नाम भी शामिल किया गया था।

shraddha bhansali

3- सविता पूनिया

ये कहानी है भारतीय हॉकी टीम की गोलकीपर व हरियाणा की हॉकी प्लेयर सविता पूनिया की. इन्हें एशिया कप में शानदार प्रदर्शन के लिए फोर्ब्स इंडिया ने 30 अंडर-30 यंग अचीवर्स भी चुना है. सिरसा जिले के गांव जोधकां में 11 जुलाई 1990 को पैदा हुई सविता पूनिया 150 इंटरनेशनल मैचों में अपने जबरदस्त प्रदर्शन की बदौलत इस मुकाम तक पहुंच पाईं हैं. फिलहाल सविता साल 2020 में टोक्यो में होने वाले ओलिंपिक पर फोकस कर रही हैं।

savita punia

4-अरुणिमा पटेल

ये कहानी है 39 साल की अरुणिमा पटेल की.  इन्होंने एक विश्वसनीय मॉलीक्यूलर टेस्टिंग सर्विस की शुरुआत की है. इससे रोगी के शरीर में इंफेक्शन के कारण को मात्र 4 घंटे के भीतर पता लगाया जा सकता है. ये iGenetic Diagnostics की मैंनेजिंग डायरेक्टर हैं. फोर्ब्स ने देश की 100 प्रतिभाशाली महिलाओं में इनका नाम भी शामिल किया है।

arunima patel

5- अवनी चतुर्वेदी

ये कहानी है फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी की। अवनी लड़ाकू विमान उड़ाने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। उन्होंने मिग-21 बाइसन को अकेले ही उड़ाकर ये कारनामा किया. भारतीय वायुसेना और देश के लिए यह एक अनोखी उपलब्धि है. दुनिया में सिर्फ ब्रिटेन, अमेरिका, इजरायल और पाकिस्तान में ही महिलाएं फाइटर पायलट बन सकती हैं। भारत सरकार ने महिलाओं को 2015 में फाइटर पायलट के लिए अनुमति दी थी।

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देश में 1991 से ही महिलाएं हेलिकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ा रही हैं, लेकिन फाइटर प्लेन से उन्हें दूर रखा जाता था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में महिलाओं के मुद्दे पर चर्चा करते हुए अवनी की उपलब्धि का जिक्र किया था. पीएम ने बताया था कि तीन बहादुर महिलाएं भावना कंठ, मोहना सिंह और अवनी चतुर्वेदी फाइटर पायलेट बनी हैं और सुखोई विमान उड़ाने का प्रशिक्षण ले रही हैं।

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