क्या पुरुष और महिलाएं आकस्मिक सेक्स के बारे में अलग अलग तरह से सोचते हैं?

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जब बात यौन तृष्णाओं की आती हैं तो कई लोगों की दबी इच्छाएं होती हैं जो लोग विभिन्न परिस्तिथियो में कल्पना करते हैं जैसे कार की पिछली सीट पर या लिफ्ट में कोई छोटा सा मौका भुनाना और इसी को आकस्मिक सेक्स कहा जाता है |

पर क्या आपने कभी सोचा है कि पुरुष और महिलाएं इस तरीके के आकस्मिक यौन-क्रिया के बारे में कैसे कैसे विचार रखते हैं? एक अजनबी के साथ भेंट का कामुक वाकये में बदल जाना आपको शर्म से लाल कर सकता है पर ये प्राकृतिक क्रिया इस संसार में हमेशा से रही है और हमेशा रहने वाली है, आधुनिकता का हमारे भोजन और यौन क्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला !

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यौन तृष्णा सभी जीवों में होती है जो उन्हें प्रजनन के लिए प्रेरित करती है परन्तु मानव समाज आधुनिक समय में बहुत जटिल हो गया है और इसमें यौन तृष्णाओं को सही और गलत की श्रेणी में बाँट दिया गया है ! समाज की अनुमति से विवाह पश्चात अपने साथी से यौन तृष्णा शांत करना सही और किसी और स्तिथि में किसी और से यौन-क्रिया करना समाज ने गलत घोषित कर दिया है ! परन्तु हमारा शारीर इस बांटों को नहीं समझता और वो यौन तृष्णा अपने अनुसार पैदा करता रहता है ! यहाँ तक की विवाह पश्चात यौन क्रिया से ऊभ चुके लोगों का एक मात्र सहारा यौन कल्पनाएँ और कुछ नयी यौन परिस्तिथियाँ ही होती हैं ! एक नए शोध में जो तथ्य निकल कर आये हैं वो आपको कुछ ऐसा बतायेंगे जिसे जान आप मुस्कुरा पड़ेंगे ;

आकस्मिक यौन के बाद अफ़सोस :

क्या आपको पता है पुरुषों को इस बात का अफ़सोस रहता है कि आकस्मिक यौन के बाद वो जानबूझकर उस महिला के साथ भविष्य में किसी भी संपर्क से बचा है; 


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