1980 में अमेरिका ने भारत को सुपर कम्प्यूटर देने से इंकार कर दिया। तब भारत में डाॅ. विजय पी. भटकर ने सुपर कम्प्यूटर के विकास में काम करना शुरू किया, उन्होंने और उनकी टीम ने 1991 में भारत के लिए सुपरकंप्यूटर परम-8000 बनाकर सबको चौंका दिया। जिससे हमारे वैज्ञानिक तारापुर बिजली घर हेतु अपना परमाणु इंधन बनाने में सफल हुए हैं, स्वदेशी तकनीक से क्रायोजेनिक इंजन बनाने में सफल हुए वहीं स्वयं के राकेट जी.एस.एल.वी. द्वारा 36,000 कि.मी. दूर उपग्रहों को स्थापित करने में भी सफल हुए हैं। उनके इतने योगदान के बावजूद देश उनके बारे में बहुत कम जानता है। आइये आज उनके बारे में आपको बताते हैं…

डॉ.विजय पी.भटकर का जन्म एवं शिक्षा-

डॉ.विजय पी.भटकर का जन्म 11 अक्टूबर, 1946 को मुरम्बा, अकोला जिला, महाराष्ट्र में हुआ। उन्होंने 1972 में इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी, दिल्ली से इंजिनियरिंग में पीएचडी की डिग्री ली। उन्होंने 1965 में विश्वेसवरैया नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी से बैचलर ऑफ इंजिनियरिंग और 1968 में महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा से मास्टर ऑफ इंजिनियरिंग की।

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डॉ.विजय पी.भटकर ने कई अहम राष्ट्रीय संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों की स्थापना करने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने सेंटर फॉर डिवेलपमेंट ऑफ अडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक), तिरुअनंतपुरम में दी इलेक्ट्रॉनिक्स रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट सेंटर (ईआर एंड डीसी), इंस्टिट्यूट ऑफ इन्फर्मेशन टकेनॉलजी ऐंड मैनेजमेंट, केरल (आईआईआईटीएम-के), ईटीएच रिसर्च लैबरेट्री ऐंड इंटरनैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इन्फर्मेशन टेक्नॉलजी, पुणे, महाराष्ट्र नॉलेज कॉर्पोरेशन (एमकेसीएल) और इंडिया इंटरनैशनल मल्टिवर्सिटी की स्थापना में उनका बड़ा योगदान है।

डॉ. भटकर का योगदान-

डॉ. भटकर 1987 में पुणे स्थित सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) में सुपर-कंप्यूटर बनाने की परियोजना का नेतृत्व कर चुके हैं. इसके तहत देश के पहले सुपर कंप्यूटर परम 8000 और परम 10000 बनाए गए थे. उन्हें 2000 में पद्मश्री और 2015 में पद्मभूषण मिल चुका है। कुछ महिने पहले कम्प्यूटर वैज्ञानिक डॉ विजय भटकर को नालंदा विश्वविद्यालय का नया कुलपति बनाया गया है. वे इस विश्वविद्यालय के तीसरे कुलपति बने.

डॉ भटकर दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष भी हैं, उनका पूरा नाम डॉ.विजय पाडुंगर भटकर है। 1972 में आईआईटी दिल्ली से इंजीनियरिंग में डाक्ट्रेट की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद भाटकर ने आईटी में शिक्षा,अनुसंधान के लिए अंतराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान की स्थापना की। इस संस्थान में उच्चतर शिक्षा के लिए शोध सुविधाओं के साथ शिक्षण की योजना बनायी गई।

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श्री भटकर द्वारा लिखी और सम्पादित बारह पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं और अस्सी से अधिक शोध प्रपत्र वह प्रस्तुत कर चुके हैं। भटकर का सपना है कि 2030 तक भारत को विश्वगुरु बनाया जाये, उनका कहना है कि भारत 2030 तक चीन और अमेरिका से आगे निकल जायेगा। इसके लिए देश को मजबूत और दूरदर्शी प्रतिनिधित्व और सही दिशा की जरूरत।है।

2003 में रॉयल सोसायटी की तरफ से दक्षिण अफ्रीका भेजे गए वैज्ञानिक दल का नेतृत्व विजय भटकर ने किया। वह भारत सरकार वैज्ञानिक सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में भी कार्यरत हैं। इसके अलावा भटकर ने भारत में ब्राडबैंड इंटरनेट का दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए भी कार्यरत हैं। भारतीय आईटी क्षेत्र में महान योगदान के लिए भटकर को कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।1

डॉ. भटकर को अब तक मिल चुके हैं कई सम्मान-

1999-2000 में महाराष्ट्र भूषण पुरस्कार, 2000 में प्रियदर्शनी पुरस्कार और 2001 में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ओमप्रकाश भसीन फाउंडेशन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कहा जाता है कि आज का युग ज्ञान का युग है । इस युग में आगे बढ़ने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अग्रणी बने रहना जरूरी है। डॉ. विजय पी. भटकर का परम श्रृंखला के कम्प्यूटरों का निर्माण कर भारत को नई ऊचाइयां छूने के लिए आधारभूमि उपलब्ध करवाई है।

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