आध्यात्मिक ऊर्जा एवं शारीरिक शक्ति संग्रह करने में कार्तिक मास का विशेष महत्व है। इसमें सूर्य की किरणों एवं चन्द्र किरणों का पृथ्वी पर पड़ने वाला प्रभाव मनुष्य के मन मस्तिष्क को स्वस्थ रखता है। इसीलिए शास्त्रों में कार्तिक स्नान और कथा श्रवण महात्म्य पर विशेष जोर दिया गया है।

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कार्तिक मास के दौरान विशेष तौर पर राधा-दामोदर पूजन, विष्णु पूजा एवं तुलसी पूजा से साधक का कल्याण होता है। यह विचार कार्तिक महात्म्य सुनाते हुए मानस मंदिर देवनगर में पं. अमर देव शास्त्री ने व्यक्त किए।

देवशयनी एकादशी से देवोत्थान एकादशी तक छः माह तुलसी की विशेष पूजा होती है। कार्तिक में तो इनका अत्याधिक महत्व बढ़ जाता है।

 

 

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उन्होंने आचरण की शुद्धि के लिए संयम को महत्वपूर्ण बताया। तुलसी पूजा का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि तुलसी के पत्ते पंचामृत में डालने पर चरणामृत बन जाता है। तुलसी में अनन्त औषधीय गुण भी विद्यमान हैं। इसीलिए हमारे ऋषि-मुनियों ने इन्हें विष्णु प्रिया कहकर पूजनीय माना।

इसीलिए कार्तिक स्नान के साथ तुलसी के पौधे के पास जो लोग कार्तिक महात्म्य सुनते हैं उनके घरों में सुख शांति रहती है।

 

 

 

Source-Webdunia.com

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