reshte naate

स्वामी विवेकानंद जी ने कहा है किः- “जीवन में ज्यादा रिश्ते होना जरूरी नही है,  पर जो रिश्ते हैं उनमें जीवन होना जरूरी है।”

शिशु जन्म के साथ ही अनेक रिश्तों के बंधन में बंध जाता है और माँ-पिता, भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी जैसे अनेक रिश्तों को जिवंत करता है। रिश्तों के ताने-बाने से ही परिवार का निर्माण होता है। कई परिवार मिलकर समाज बनाते हैं और अनेक समाज सुमधुर रिश्तों की परंपरा को आगे बढाते हुए देश का आगाज करते हैं।

 

सभी रिश्तों का आधार संवेदना होता है, अर्थात सम और वेदना का यानि की सुख-दुख का मिलाजुला रूप जो प्रत्येक मानव को धूप – छाँव की भावनाओं से सराबोर कर देते हैं। रक्त सम्बंधी रिश्ते तो जन्म लेते ही मनुष्य के साथ स्वतः ही जुङ जाते हैं। परन्तु कुछ रिश्ते समय के साथ अपने अस्तित्व का एहसास कराते हैं। दोस्त हो या पङौसी, सहपाठी हो या सहर्कमी तो कहीं गुरू-शिष्य का रिश्ता।

यह भी पढ़ें : रिश्ते नाते हमारी जिंदगी का एहम हिसा है इनको आंच न आने दे…….

रिश्तों की सरिता में सभी भावनाओं और आपसी प्रेम की धारा में बहते हैं। अपनेपन की यही धारा इंसान के जीवन को सबल और यथार्त बनाती है, वरना अकेले इंसान का जीवित रहना भी संभव नही है। सुमधुर रिश्ते ही इंसानियत के रिश्ते का शंखनाद करते हैं।

स्वीट फॅमिली

इंसानी दुनिया में एक दूसरे के साथ जुङाव का एहसास ही रिश्ता है, बस उसका नाम अलग-अलग होता है। समय के साथ एक वृक्ष की तरह रिश्तों को भी संयम, सहिष्णुता तथा आत्मियता रूपी खाद पानी की आवश्यकता होती है। परन्तु आज की आधुनिक शैली में तेज रफ्तार से दौङती जिंदगी में बहुमुल्य रिश्ते कहीं पीछे छुटते जा रहे हैं।

रिश्तों का जिक्र हो और पति-पत्नी के रिश्तों की बात न हो ये संभव नही है क्योंकि ये रिश्ता तो पूरे परिवार की मधुरता का आधार होता है। इस रिश्ते की मिठास और खटास दोनो का ही असर बच्चों पर पङता है।  कई बार ऐसा होता है कि, छोटी-छोटी नासमझी  रिश्ते की दिवार को बड़ा  बना देती है।

यह भी पढ़ें : कुछ ऐसी गलतियाँ जिनसे रिश्तों में आती है कड़वाहट

जबकि पति-पत्नी का रिश्ता एक नाजुक गुलाब की कली की तरह  होता है। जिसे अगर जोर से पकङो तो टूट जाती है, धीरे से पकङो तो फूल खिल जाता है। जिस तरह कली के साथ फूल खिलखिलाता दिखाई देता है उसी तरह हर रिश्ते को यदि प्यार और विश्वास से पकङो तो उम्रभर साथ रहता है।

pati patni

अक्सर देखने को मिलता है कि आपसी रिश्ते में जरा सी अनबन और झुठे अंहकार की वजह से क्रोध की अग्नी में स्वाह हो जाते हैं। रिश्तों से ज्यादा उम्मीदें और नासमझी से हम में से कुछ लोग अपने रिश्तेदारों से बात करना बंद कर देते हैं। जिससे दूरियां इतनी बढ जाती है, कि कई बार हम बात करना ही बंद कर देते है बिना सोचे समझे ,हमे अपनी बात दूसरों के आगे रखनी और उनकी सुननी है तब जाकर हमे फेंसला लेना चाहिए ,यदि समय पर सही फेंसला नही लिया तो पछतावे के सिवाय कुछ भी हाँथ नही आता।

किसी ने बहुत सही कहा हैः-  “यदि आपको किसी के साथ उम्रभर रिश्ता निभाना है तो, अपने दिल में एक कब्रिस्तान बना लेना चाहिए। जहाँ सामने वाले की गलतियों को दफनाया जा सके।”

कोई भी रिश्ता आपसी समझदारी और निःस्वार्थ भावना के साथ परस्पर प्रेम से ही कामयाब होता है। यदि रिश्तों में आपसी सौहार्द न मिटने वाले एहसास की तरह होता है तो, छोटी सी जिंदगी भी लंबी हो जाती है।

इंसानियत का रिश्ता यदि खुशहाल होगा तो देश में विश्वास और अपनेपन की मिठास से रिश्तों के महत्व को आज भी जीवित रखा जा सकता है। वरना गलत फहमी और नासमझी से हम लोग, सब रिश्ते एक दिन ये सोचकर खो देंगे कि वो “मुझे याद नही करते तो मैं क्यों करूं” बात आपके दिल दिमाग में कभी आने पाए कोशिश करना क्यूंकि यह रिश्ते बड़े अनमोल होते है।

 

Comments

comments


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *