युवाओं की समस्या और सोशल मीडिया


पाकिस्तान बांग्लादेश और श्री लंका में पोर्ट बना कर हमें घेर रहा है (ताकि जब देश इस्लामिक चरमपंथी, माओवादी और नक्सली गृहयुद्ध से कमजोर हो जाये तो हमला किया जा सके जैसे 1962 में किया था)

 

ISIS और दूसरे विदेशी आक्रांता देसी गद्दारों की सहायता से देश में घुसने की तैयारी में हैं जैसे 900 साल पहले होता था । कश्मीर और केरल में इनकी जड़ें फ़ैल रही हैं ।

 

America

और उसकी बनाई संस्थाएं जैसे IMF, World बैंक और कंपनियां हमारी अर्थव्यवस्था पर जोंक की तरह चिपकी हमारी सारी कमाई चूसती रहती हैं ।

 

Christian countries aur Arab-kuwait-dubai

से हमारे यहाँ हिंदुओं को क्रिस्चियन और मुस्लमान बनाने के लिए पैसा आता है और उन पैसो से बने बड़े बड़े संगठन राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त हैं ।

 

पर देश के युवाओं (20 से 35 साल वाले) की सबसे बड़ी समस्या है कि उनके माँ-बाप उन्हें उनकी मर्जी से शादी नहीं करने दे रहे । और माँ-बाप भी युवाओं के लिए समस्या खड़ी करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते, एक तरफ आरक्षण और दूसरी तरफ इनके नखरे कि इंजीनियर नहीं डॉक्टर बन, नम्बर कम कैसे आये, कॉलेज अच्छा क्यों नहीं मिला, शादी में 15 लाख मिलते तूने लड़की क्यों पसंद की, लड़की गोरी क्यों नहीं है, खानदान की नाक क्यों कटवाई, जात में कोई नहीं मिली/मिला क्या, तेरी हिम्मत कैसे हुई किसी लड़के के बारे में सोचने की, लड़के को जान से मार देंगे तेरी टाँगें काट देंगे बक बक बक बक बक बक ।

आने वाले 20 सालों में क्या होगा किसी को पता नहीं और इन्हें राजसी खानदान खड़ा करना होता है जिसका पहला वंशज इनकी औलाद बनेगी ।

 

ऐसे में युवा के पास 2 ही विकल्प बचते हैं

1) अपना काम करे और माँ-बाप से दूरी बना ले

2) इंटरनेट पर भड़ास निकाले और जो प्यार असली दुनिया में नहीं कर पाया उसे इंटरनेट पर करे ।

 

और अगर कोई सोशल मीडिया पर मिल जाये तो टेलिकॉम कंपनियों द्वारा चलाये जा रहे फ्री कालिंग पैक डाल कर घंटों फोन पर “शोना बाबू प्यारु बेटू लव यू” जैसी बातों से आनंद लेते रहें ।

 

ऐसे में अचेतन भगत जैसे देश के कुछ होनहार लेखक युवाओं को जब ये बताते हैं कि तुम्हें अंग्रेजी नहीं आती इसलिए तुमसे लड़कियां नहीं पटतीं और तुम यौनकुंठा का शिकार हो इसलिए इंटरनेट पर देश की दशा पर चिंतन करने से अच्छा है अंग्रेजी सीखो, पार्टनर ढूंढो और सेक्स करो तो लगता है कि ऐसे यौनि बाबाओं को तालिबानी पठानों के बीच लौंडा बना कर भेजा जाये तब जाकर हमें चैन मिलेगा ।

 

पर समस्या जस की तस रहती है

कि जो मिला उससे शादी कैसे हो और युवा अपनी जवानी के मुख्या साल बर्बाद कर देते हैं । अबे एक बार तो निर्णय लेना ही पड़ेगा । परिवर्तन के दौर में जीने वालों को हमेशा ही कुछ झेलना पड़ता है भाई, हम जब कॉलेज में थे तो 2 बार सिलेबस बदल गया और पुराने स्टूडेंट से लिए सारे नोट्स बेकार हो गए और 2 साल मेहनत करनी पड़ी । निर्णय लो आर या पार, और अपने बड़े होने का घर वालों को सबूत दो, तभी समाज बदलेगा । और अगर ये करने की हिम्मत नहीं है तो चुपचाप घर वालों की मर्जी से शादी करो और समाज में अपना योगदान दो।

JAI HIND

बच्चे दो ही अच्छे

हिंदुस्तान जिंदाबाद

अबकी बार, मोदी सरकार

पेड़ लगाओ पर्यावरण बचाओ ।

~Ajay


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