भारतीय नौसेना के नाविक ने कराया लिंग परिवर्तन,नेवी से गंवानी पडी नौकरी


नाविक अपनी मर्जी से लिंग परिवर्तन कराकर महिला बन गया :

नौसेना के नाविक ने अपनी मर्जी से लिंग परिवर्तन कराकर महिला बन गया है। मामले की जानकारी होने के बाद नौसेना ने रक्षा मंत्रालय में उनका केस भेजा था, जहां से फैसला आया कि उन्हें नौसेना से बर्खास्त कर दिया जाए।नौसेना ने बताया है कि नाविक मनीष गिरी ने छुट्टी के दौरान किसी प्राइवेट फैसिलिटी में सेक्स चेंज की सर्जरी कराई थी। यह काम उन्होंने अपनी मर्जी से किया था, जिसे बाद में बदला नहीं जा सकता।

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हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, नेवी को तब तक इस सर्जरी के बारे में नहीं पता था, जब तक नाविक यूरिनरी ट्रेक्ट इंफेक्शन के चलते बीमार होने के कारण तीन हफ्तों की लंबी छुट्टी के बाद विशाखापतनम के नौसेना बेस वापस लौट आया।

जब गिरी के सीनियर्स को सर्जरी के बारे में पता चला, तो उन्होंने उसे साइकेट्रिस्ट ट्रीटमेंट के लिए नेवी के अस्पताल में भेज दिया।मनीष ने कहा कि मुझे छह महीनों तक पुरुषों के साइकेट्रिस्ट वार्ड में रखा गया।यहां रहना जेल में रहने के बराबर था।जब डॉक्टर ये साबित करने में नाकाम रहे कि मैं दिमागी रूप से बीमार हूं, तो आखिरकार मुझे डिस्चार्ज कर दिया गया।

नियम के खिलाफ है ट्रांसजेंडर :

नौसेना में भर्ती के बाद शामिल होने के दौरान उनका जेंडर अलग था, उसमें बदलाव कर उन्होंने भर्ती के नियमों और अपनी नियुक्ति की योग्यता के मानकों को तोड़ा है।

यह कदम नौसेना के उन नियमों के तहत उठाया गया है, जिसके प्रावधान के मुताबिक यह बता दिया जाता है कि सेवा की कोई जरूरत नहीं रह गई है। गौरतलब है कि नौसेना में नाविक के पद पर सिर्फ पुरुषों की नियुक्ति होती रही है।

 

नौसेना को पहली बार ऐसे केस का सामना करना पड़ा है। एक अधिकारी ने बताया कि मनीष शादी शुदा हैं और एक बच्चे के पिता हैं। सात साल पहले वह नेवी की मैकेनिकल इंजीनयरिंग विंग में शामिल हुए थे।

पहली बार सामने आया मामला :

गौरतलब है कि भारतीय सशस्त्र बलों में इस तरह का यह पहला मामला है। सेना में 1990 के शुरुआती दिनों से छोटी संख्या में महिला अधिकारियों को शामिल कर रही है। मगर, नाविकों, सैनिकों और एयरमैन के निचले रैंकों में केवल पुरुषों की नियुक्ति ही की जा रही है। ट्रांसजेंडर या ट्रांससेक्सुअल लोगों को सशस्त्र बलों में शामिल होने की इजाजत नहीं है।

कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में मनीष गिरी ने बताया था कि वह पैदाइशी पुरुष था। 7 साल पहले ईस्टर्न नेवल कमान के मरीन इंजिनियरिंग विभाग में बतौर सिपाही उसने जॉइन किया था।

2016 में उन्होंने विजाग में एक डॉक्टर से बात की और अपना इलाज करवाया। लेकिन गिरी को महसूस हुआ कि उसके पास कोई विकल्प नहीं है इसलिए उन्होंने बाइस दिन की लीव ली और दिल्ली में सेक्स रिअसाइनमेंट सर्जरी करवाई।

सर्जरी के बाद गिरी विशाखापतनम के नौसेना बेस में वापस आए, लेकिन महिला बनकर। इसके बाद उन्होंने सिर के बाल बढ़ा लिए थे और साड़ी पहनना शुरू कर दिया। 7 साल पहले नौसेना में भर्ती गिरी की 15 साल की सेवा पूरी ना होने के कारण अब उन्हें पेंशन भी नहीं मिलेगी।

उन्होंने कहा, मैं बतौर इंजीनियर काम कर रहा था और शिप पर मेरी जरूरत होती थी. लेकिन मेरी नई पहचान के कारण मुझे शिप से हटाकर बेस पर काम करने के लिए मजबूर किया गया।

न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे :

उनका कहना है कि वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और न्याय के लिए संघर्ष करेंगे। मनीष ने अपना नाम बदलकर साबी कर लिया है। उनका कहना है कि मैंने सात साल तक देश की सेवा की है। सिर्फ इसलिए मुझे नौकरी से क्यों निकाला जा सकता है कि मैंने अपना सेक्स चेंज करवा लिया है। मैं कोई चोर या आतंकी नहीं हूं।


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