समुद्र का किनारा

एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी जो शायद आपने सुनी हो लेकिन हो सकता कि उसका अभी तक आपने अपने जीवन में उपयोग नहीं लिया हो। यह कहानी यह बताती है कि आप मानों या न मानों लेकिन छोटी-छोटी चीजों से कुछ फर्क तो पड़ता ही है।

एक आदमी समुद्रतट पर चल रहा था। उसने देखा कि कुछ दूरी पर एक युवक ने रेत पर झुककर कुछ उठाया और आहिस्ता से उसे पानी में फेंक दिया। उसके नज़दीक पहुँचने पर आदमी ने उससे पूछा-“और भाई, क्या कर रहे हो?”

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युवक ने जवाब दिया – “मैं इन मछलियों को समुद्र में फेंक रहा हूँ।” “लेकिन इन्हें पानी में फेंकने की क्या ज़रूरत है?”- आदमी बोला। युवक ने कहा – सूरज की गर्मी बढ़ रही है। अगर मैं इन्हें वापस पानी में नहीं डालूँगा तो ये मर जाएँगी”।

आदमी ने देखा कि समुद्रतट पर दूर-दूर तक मछलियाँ बिखरी पड़ी थीं। वह बोला – “इस मीलों लंबे समुद्रतट पर न जाने कितनी मछलियाँ पड़ी हुई हैं। इस तरह कुछ को पानी में वापस डाल देने से तुम्हें क्या मिल जाएगा? इससे क्या फर्क पड़ जायेगा?”

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युवक ने शान्ति से आदमी की बात सुनी,फ़िर उसने रेत पर झुककर एक और मछली उठाई और उसे आहिस्ता से पानी में फेंककर वह बोला

आपको इससे कुछ मिले न मिले
मुझे इससे कुछ मिले न मिले
दुनिया को इससे कुछ मिले न मिले
लेकिन इस मछली को सब कुछ मिल जाएगा

यह केवल सोच का ही फर्क है। सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति को लगता है कि उसके छोटे छोटे प्रयासों से किसी को बहुत कुछ मिल जायेगा लेकिन नकारात्मक सोच के व्यक्ति को यही लगेगा कि,यह समय की बर्बादी है? बहुत कम लोग ऐसे मिलते हैं जो दूसरों का भला चाहें।

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