नानाजी देशमुख जैसे नेता युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत :

PM नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि लोकनायक जय प्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख जैसे नेता युवाओं के लिए प्रेरणा के स्रोत है। जिन्होंने अपना जीवन देश के नाम समर्पित कर दिया लेकिन राजनीतिक पदों से हमेशा दूर रहे। नानाजी देशमुख को भारत के सार्वजनिक जीवन की एक महान हस्ती के रूप में सभी से प्रशंसा और सम्मान मिला। देश के लिए उनका योगदान अमूल्य है।

 

 

नरेंद्र मोदी बोले ‘सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुख को उनकी जयंती पर सादर स्मरण.’ उन्होंने कहा कि, हम उनकी नेक नियत और ग्रामीण विकास पर जोर देने के कार्यो से सतत रूप से प्रेरित रहते हैं। प्रधानमंत्री ने जय प्रकाश नारायण को भी उनकी जयंती पर नमन किया।

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नानाजी देशमुख को उनकी जयंती पर याद करते हुए :

जयप्रकाश नारायण और नानाजी देशमुख को उनकी जयंती पर याद करते हुए PM नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब भ्रष्टाचार के खिलाफ जयप्रकाश जंग लड़ रहे थे तो दिल्ली की सल्तनत में खलबली मच गई थी। लोकनायक को रोकने के लिए षड्यंत्र होते थे।

 

पटना के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में जेपी पर हमला हुआ। उनके बगल में नानाजी देशमुख खड़े थे। नानाजी ने अपने हाथों पर मृत्यु के रूप में आए प्रहार को झेल लिया.हाथ की हड्डियां टूट गई। वो ऐसी घटना थी कि देश का ध्यान नानाजी देशमुख की तरफ गया।

यह अक्टूबर 2014 का एक भाषण है, जिसमें श्री मोदी ने विस्तार से नानाजी देशमुख और उनके महान व्यक्तित्व के बारे में बातें की हैं। 

देश के संकल्प के लिए खुद को सौंप दिया :

उन्होंने कहा कि इन दोनों महापुरुषों ने अपने जीवनकाल में देश के संकल्प के लिए खुद को सौंप दिया। इन दोनों के जीवन का पल-पल मातृभूमि के लिए, देशवासियों के कल्याण के लिए था और आजीवन इसमें जुटे रहे।1942 में भारत छोड़ो आंदोलन तीव्रता पर पहुंचा ऐसे समय में जयप्रकाश जी, लोहिया जी जैसे युवाओं ने आगे आकर आंदोलन की डोर संभाली। उस कालखंड में वे लोगों की प्रेरणा का स्रोत बन गए।

जेपी और नानाजी देशमुख के सामाजिक जीवन से जुड़े कार्यों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा,’ ‘आजादी के बाद सत्ता के गलियारों में लोग जगह ढूंढ़ते थे, जयप्रकाश जी ने सत्ता से खुद को दूर रखा। उन्होंने और उनकी पत्नी प्रभादेवी ने ग्रामोत्थान के मार्ग को चुना।

उन्होंने कहा कि नानाजी देशमुख को देश ज्यादा जानता नहीं था। संसाधनों को ग्राम विकास के काम में लगाया। नानाजी देशमुख को मंत्री पद के लिए मोराराजी की सरकार में आमंत्रित किया गया, लेकिन उन्होंने विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया।  प्रधानमंत्री मोदी ने नानाजी को ग्राम सेवा में लगे रहने वाला कार्यकर्ता बताया।

 

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