लोटाबंदी ओडीएफ टीम ने 10 लाख रुपये तक का जुर्माना वसूला :

खुले में शौच करने वालों की अब खैर नहीं है। खुले में शौच से मुक्ति अभियान के तहत रोहतास जिले में जबरदस्त अभियान चलाया जा रहा है। जिले में अब शौचालय का उपयोग नहीं करने वालों से ओडीएफ टीम ने 10 लाख रुपये तक का जुर्माना वसूला है। जुर्माने की राशि से 83 शौचालयों का निर्माण कराया जा सकता है।

अब बात करते हैं मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिला की जिधर जिला प्रशासन की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी में रखे लोटों ने दर्शकों को लोटपोट कर दिया। ये वे लोटे हैं, जिन्हें जिला प्रशासन ने खुले में शौच करने वाले लोगों से जब्त किया हैं। स्वच्छ भारत अभियान के तहत इस तरह की प्रदर्शनी देश में पहली बार देखने को मिली है। ग्वालियर की जिला पंचायत ने गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए ‘लोटा छीनो’ अभियान चलाया था।

एक हजार से अधिक लोटे उन महिलाओं एवं पुरूषों से जब्त :

इस अभियान में एक हजार से अधिक लोटे उन महिलाओं एवं पुरूषों से जब्त किए गए थे, जो सुबह-शाम शौच के लिए खेत में जाते थे। ताजुब की बात तो यह है कि यह अभियान काफी चर्चित और असरदार रहा था। इस अभियान के कारण ही ग्वालियर जिले के सभी 256 गांव खुले में शौच से मुक्त गांव की श्रेणी में आ गए हैं। ग्वालियर जिला पंचायत ने अभियान में जब्त किए गए लोटों को बकायदा सरकारी भंडारगृह में रखा है।

जिला पंचायत के परियोजना अधिकारी जय सिंह नरवरिया कहते हैं कि जब्त किए गए ये लोटे हमारे प्रयासों की हमेशा याद दिलाते रहेंगे। नरवरिया बताते हैं लोटे की प्रदर्शनी अपनी सफलता की कहानी बताने के लिए लगाई गई है। नरवरिया ने बताया कि लोटा छिनने के लिए सोलह टीमें बनाई गईं थीं। इस टीम में सरकारी कर्मचारियों के अलावा स्थानीय महिलाएं एवं पुरूष भी रहते थे। लोटा छिनने का काम स्थानीय लोग ही करते थे।

 लोटा जब्त करने का अभियान सुबह चार बजे से शुरू होता था :

मध्यप्रदेश के अधिकांश गांवों में लोगों को खुले में शौच करने की आदत बनी हुई है। राज्य में पचास हजार से अधिक गांव हैं। अब तक सिर्फ 18579 गांव ही खुले में शौच से मुक्त हो पाए हैं। स्वच्छ भारत मिशन में उपायुक्त अजीत तिवारी बताते हैं कि प्रदेश के गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए कई तरह के प्रयास स्थानीय स्तर पर चल रहे हैं।  इसमें लोटा छिनने का प्रयास भी एक है।

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खुले में शौच से होने वाले नुकसानों के बारे में भी बताया गया। स्थानीय पंचायतों की भूमिका इस काम में अहम होती है। पंचायत और ग्राम सभा की सहमति से खुले में शौच करने वाले लोगों पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है। ग्वालियर में दंड से साढ़े चार लाख रूपए की राशि मिली। इसका उपयोग सार्वजनिक शौचालय के निर्माण में किया गया है।

लाउडस्पीकर से पूरे गांव को  बताया जाता था कि खेत में कौन बैठा है :

मध्यप्रदेश के आदिवासी बाहुल्य जिले बैतूल में स्थानीय सरपंच ने अपने गांव को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए पिछले साल काफी दिलचस्प अभियान चलाया था। इस अभियान में  स्वच्छता अभियान का प्रेरक मोबाइल के जरिए खेत में बैठे व्यक्ति का नाम बताते थे। सरपंच ने पंचायत भवन में एक माइक लगा रखा था। मोबाइल के स्पीकर को माइक के सामने रख पूरे गांव को सुनाया जाता था कि इस वक्त खेत में कौन व्यक्ति खुले में शौच कर रहा है। मध्यप्रदेश के पंचायत कानून में पंच, सरपंच का चुनाव लड़ने  की पात्रता उन व्यक्तिों को ही जिनके घरों में साफ-सुथरे शौचालय हैं।

जिनके घर शौचालय उन्हें ही मिलेगा कन्यादान योजना का लाभ :

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार की ओर से चलाई जा रही कई हितग्राही मूलक योजनाओं से टॉयलेट की अनिर्वायता जोड़ दिया गया है। सरकार ने अपने ताजा निर्णय में उन्हीं लोगों को कन्यादान योजना का लाभ देने का निर्णय लिया है।

जिनके घर में शौचालय है। इसके लिए योजना का लाभ लेने वाले जोड़ों को शपथ पत्र  भी देना होगा। शपथ पत्र के साथ टॉयलेट के सामने खड़े होकर खिंचाई गई फोटो भी लगाना होगी।

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