coal scam case

मधु कोड़ा को तीन साल की सजा के साथ ही 25 लाख का जुर्माना :

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े एक मामले में दोषी पाए गए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एच.सी.गुप्ता एवं अन्य को सजा सुना दी है। कोर्ट ने मधु कोड़ा को तीन साल की सजा के साथ ही 25 लाख का जुर्माना लगाया। वहीं पूर्व कोयला सचिव को तीन साल की सजा सुनाते हुए एक लाख का आर्थिक दंड दिया गया है।

नॉर्थ कोल ब्लॉक विसुल को आवंटित करने के लिए सरकार और इस्पात मंत्रालय ने कोई अनुशंसा नहीं की थी। तब तत्कालीन कोयला सचिव एचसी गुप्ता और झारखंड के तत्कालीन मुख्य सचिव अशोक कुमार बसु की सदस्यता वाली 36वीं स्क्रीनिंग कमेटी ने अपने स्तर पर ही इस ब्लॉक को आवंटित करने की सिफ़ारिश कर दी। इसी को आधार बनाकर तत्कालीन मधु कोड़ा सरकार ने यह कोयला खदान विसुल को आवंटित कर दी।

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साल 2007 में हुए इस आवंटन के बदले अरबों रुपये की रिश्वतखोरी और हेरफेर का आरोप लगाया गया। आरोप है कि स्क्रीनिंग कमेटी ने इस मामले में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी अंधेरे में रखा। तब कोयला मंत्रालय का प्रभार भी प्रधानमंत्री के ही पास था। लिहाजा उन्हें इसकी जानकारी देनी चाहिए थी।

आखिर कौन हैं मधु कोड़ा?

मधु कोड़ा की उम्र 46 साल की हैं और  सितंबर 2006 से अगस्त 2008 तक झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वो इस आदिवासी राज्य के पांचवें मुख्यमंत्री थे। मुख्यमंत्री बनने के समय वो राज्य की विधानसभा में निर्दलीय विधायक थे। राजनीति में ऑल झारखंड स्टूडेंड यूनियन (आजसू) के एक कार्यकर्ता के तौर पर शुरूआत करने वाले मधु कोड़ा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से भी जुड़े रहे हैं।

बीजेपी की बाबूलाल मरांडी की सरकार में कोड़ा पंचायती राज मंत्री बने थे। वर्ष 2005 के चुनाव में बीजेपी ने मधु कोड़ा को टिकट नहीं दिया था। इसके बाद कोड़ा निर्दलीय चुनाव लड़कर जीते थे। विधानसभा में किसी पार्टी या गठबंधन को बहुमत नहीं मिलने पर उन्होंने बीजेपी के नेतृत्व वाले अर्जुन मुंडा सरकार को अपना समर्थन दिया था।

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सितंबर 2006 में मधु कोड़ा और 3 दूसरे निर्दलीय विधायकों ने अर्जुन मुंडा सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। जिसके बाद अल्पमत में आई बीजेपी सरकार गिर गई थी। बाद में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाकर राज्य में अपनी सरकार बनाई थी। उन्होंने अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत छात्र नेता के तौर पर की थी।

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