मध्यप्रदेश में जानवरों को ‘दया मृत्यु’ देने के अपनी तरह के संभवत: पहले मामले में आज पांच दिसंबर को स्थानीय कमला नेहरू चिड़ियाघर में 33 साल के लकवाग्रस्त हिमालयन भालू को मौत की नींद सुलाया जायेगा.

चिड़ियाघर के प्रभारी डॉ. उत्तम यादव ने बताया कि लम्बे वक्त से बीमार हिमालयन भालू ‘सोनू’ को ‘दया मृत्यु’ देने के लिये उन्हें दिल्ली स्थित सेंट्रल जू अथॉरिटी और भोपाल के चीफ वाइल्डलाइफ वॉर्डन कार्यालय की मंजूरी मिल चुकी है.

उन्होंने बताया कि हिमालयन भालू की औसत उम्र 25 से 30 साल के बीच होती है. लेकिन सोनू की उम्र करीब 33 साल हो चुकी है.

यादव ने कहा कि सोनू पिछले ढाई साल से लकवे से जूझ रहा है. उसके एक तिहाई शरीर को लकवा मार गया है. लगातार इलाज के बावजूद उसकी हालत में सुधार नहीं हो रहा है.

उन्होंने बताया, ‘‘लकवे के कारण भालू बेहद तकलीफ में है. वह ठीक से आहार नहीं ले पा रहा है. दया मृत्यु से उसे सारे कष्टों से मुक्ति मिल जायेगी.’’

 चिड़ियाघर प्रभारी ने बताया कि हिमालयन भालू को ‘दया मृत्यु’ देने के लिये एक खास दवा का इंजेक्शन तैयार किया गया है. उसे कल जैसे ही यह इंजेक्शन लगाया जाएगा, उसे धीरे-धीरे नींद आने लगेगी. एक घंटे के भीतर उसका दिल काम करना बंद कर देगा और वह हमेशा के लिए सो जायेगा.

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