धौलाधार पर्वत श्रृंखला :

धर्मशाला हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा घाटी का प्रमुख पर्यटन स्थल है। धर्मशाला के एक ओर जहां धौलाधार पर्वत श्रृंखला है वहीं दूसरी ओर उपजाऊ घाटी व शिवालिक पर्वतमाला है। यहां दलाई लामा का स्थायी निवास और तिब्बत की निर्वाचित सरकार का मुख्यालय स्थापित होने से यह स्थल विश्व पर्यटन मानचित्र पर उभर कर आ गया है।

धर्मशाला की ऊंचाई 1,250 मीटर (4,400 फीट) और 2,000 मीटर (6,460 फीट) के बीच है। यह अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, जहां पाइन के ऊंचे पेड़, चाय के बागान और इमारती लकड़ी पैदा करने वाले बड़े वृक्ष ऊंचाई, शांति तथा पवित्रता के साथ यहां खड़े दिखाई देते हैं।

वर्ष 1960 से, जब से दलाई लामा ने अपना अस्‍थायी मुख्‍यालय यहां बनाया, धर्मशाला की अंतरराष्‍ट्रीय ख्‍याति भारत के छोटे ल्‍हासा के रूप में बढ़ गई है।

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ओक और शंकुधारी वृक्षों से भरे जंगलों के बीच बसा यह शहर कांगड़ा घाटी का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यताप्राप्त धर्मशाला को ‘भारत का छोटा ल्हासा’ उपनाम से भी जाना जाता है।

हिमालय की दिलकश, बर्फ से ढकी चोटियां, देवदार के घने जंगल, सेब के बाग, झीलों व नदियों का यह शहर पर्यटकों को प्रकृति की गोद में होने का एहसास देता है।

कांगड़ा कला संग्रहालय:

कला और संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए यह संग्रहालय एक बेहतरीन स्थल हो सकता है। धर्मशाला के इस कला संग्रहालय में यहां के कलात्मक और सांस्कृतिक चिह्न मिलते हैं। 5वीं शताब्दी की बहुमूल्य कलाकृतियां और मूर्तियां, पेंटिंग, सिक्के, बरतन, आभूषण, मूर्तियां और शाही वस्त्रों को यहां देखा जा सकता है।

मैकलौडगंज :

अगर आप तिब्बती कला व संस्कृति से रूबरू होना चाहते हैं तो मैकलौडगंज एक बेहतरीन जगह हो सकती है। अगर आप शौपिंग का शौक रखते हैं तो यहां से सुंदर तिब्बती हस्तशिल्प, कपड़े, थांगका (एक प्रकार की सिल्क पेंटिंग) और हस्तशिल्प की वस्तुएं खरीद सकते हैं। यहां से आप हिमाचली पशमीना शाल व कारपेट, जो अपनी विशिष्टता के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित हैं, की खरीदारी कर सकते हैं।

समुद्रतल से 1,030 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मैकलौडगंज एक छोटा सा कसबा है. यहां दुकानें, रेस्तरां, होटल और सड़क किनारे लगने वाले बाजार सबकुछ हैं। गरमी के मौसम में भी यहां आप ठंडक का एहसास कर सकते हैं।

यहां पर्यटकों की पसंद के ठंडे पानी के झरने व झील आदि सबकुछ हैं। दूरदूर तक फैली हरियाली और पहाडि़यों के बीच बने ऊंचेनीचे घुमावदार रास्ते पर्यटकों को ट्रैकिंग के लिए प्रेरित करते हैं।

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भगसूनाथ डल झील के समीप स्थित है। यहां भगसूनाथ का मंदिर है। धर्मशाला से यह स्थान लगभग 11 किलोमीटर दूर है। सेंट जान चर्च भी देखने योग्य जगह है।

धर्मशाला−मैकलोडगंज मार्ग के बीच में स्थित यह चर्च पत्थरों से बनी हुई है तथा इसे लार्ड एल्यिन की याद में बनाया गया है। हरे−भरे वृक्षों से आच्छादित इस चर्च की रंगीन कांच की खिड़कियां पर्यटकों का मन मोह लेती हैं।

पिकनिक के लिए करेरी जगह बहुत ही मनमोहक :

करेरी भी एक लुभावना पिकनिक स्थल है। समुद्र तल से 3,250 मीटर ऊंचाई पर स्थित करेरी झील तथा इसके आसपास फैली मखमली चारगाहें एक अनूठा आनंद प्रदान करती हैं। यह स्थान धर्मशाला से 22 किलोमीटर दूर है।

आप धर्मशाला आए हैं तो धर्मकोट भी अवश्य जाएं। यहां पर पर्यटकों का तांता लगा रहता है। यहां से कांगड़ा घाटी सहित धौलाधार की पर्वत श्रृंखलाएं साफ दिखती हैं।

धर्मशाला का निकटवर्ती रेलवे स्टेशन कांगड़ा है जोकि धर्मशाला से 18 किलोमीटर दूर है। धर्मशाला भारत के प्रमुख सड़क मार्गों से जुड़ा हुआ है। यहां के लिए चंडीगढ़, दिल्ली, देहरादून, शिमला, मनाली व पठानकोट से सीधी बस सेवाएं उपलब्ध हैं।

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