गुजरात विधानसभा चुनाव : सिर्फ राहुल गांधी के भाषणों से नहीं चलेगा काम, कांग्रेस के सामने हैं कई चुनौतियां

rahul in gujraat

बीजेपी से पहले ही अपने चुनावी प्रचार की धुआंधार शुरुआत :

गुजरात विधानसभा चुनाव  इस साल दिसंबर में होने हैं।  राज्य में कांग्रेस कई सालों से सत्ता में नहीं है।  इस बार कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी से पहले ही अपने चुनावी प्रचार की धुआंधार शुरुआत की है।  बदले-बदले से नजर आ रहे राहुल गांधी ने पिछले 10 दिन में ऐसे बयान दिए हैं जिसकी उम्मीद बीजेपी तो क्या कांग्रेस के नेताओं ने भी नहीं की होगी।  उनके बयानों का अभी तक बीजेपी मुकम्मल जवाब नहीं दे पाई है।

खास बात यह है कि ऐसा पहली बार है कि राहुल को सुनने आई जनता उनके बयानों को सुनकर ताली बजा रही है।  जीएसटी और नोटबंदी के बाद से व्यापारी वर्ग भी बीजेपी से खासा नाराज है।  कांग्रेस को लगता है कि इस मौके को चुनाव में जरूर भुनाना चाहिए।  इसके साथ इस बार राहुल सभा में स्थानीय मुद्दों पर भी अच्छा खासा जोर दे रहे हैं।

कांग्रेस के लिए इस बार लड़ाई इसलिए भी आसान नजर आ रही है कि इस बार चुनाव में चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नहीं होंगे और अमित शाह भी अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।  हालांकि बीजेपी भी इस बार 150 सीटों का लक्ष्य लेकर चल रही है।  इन सभी चुनावी गुणा-भाग के बीच कांग्रेस के लिए गुजरात की धरती पर करिश्मा कर देना इतना आसान नहीं होगा। राज्य में उसके सामने भी कई चुनौतियां है।

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कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सोमवार को केंद्र और राज्य के पार्टी नेताओं के साथ बैठक :

राहुल गाँधी और उनके मुख्य रणनीतिकारों का सोचना है कि नोटबंदी और जीएसटी को लेकर हो रही शुरुआती दिक्कतों से उनके और कांग्रेस के पक्ष में हवा बन सकती है। कांग्रेस उपाध्यक्ष ने सोमवार को केंद्र और राज्य के पार्टी नेताओं के साथ बैठक की।  इस बैठक में नोटबंदी की सालगिरह 8 नवंबर को ब्लैक डे के तौर पर मनाने के लिए कार्यकर्ताओं को उत्साहित करने और कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई।  इनमें जिला और राज्य मुख्यालयों पर नोटबंदी के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करना शामिल है। कांग्रेस नेता सिर्फ एक ही काम करते है लोगो को भड़काने का।

 संगठन के मामले में भी कांग्रेस बीजेपी से कोसो पीछे :

अब बात करते है एकता की तो संगठन के मामले में भी कांग्रेस बीजेपी से कोसो पीछे है।  बीजेपी के पास जहां आरएसएस की संगठनात्मक ताकत है तो साथ ही कार्यकर्ताओं की पूरी फौज है।  बीजेपी ने लोकसभा चुनाव के समय से ही ‘पन्ना प्रमुख’ को तरजीह दी जाती रही है।  उत्तर प्रदेश के चुनाव में पन्ना प्रमुखों का शानदार जीत में अहम योगदान माना जाता है।

हाल ही में राहुल की ओर से कुछ ऐसे बयान दिए गए :

राहुल गांधी ने कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने बहुत कुछ सिखा दिया है। इससे पहले राहुल गाँधी कुछ नही जानते थे।  राहुल यही नहीं रूके उन्होंने कहा कि बीजेपी ने पीट-पीट कर उनकी आंखें खोल दी हैं।  इसके बाद राहुल ने कहा ‘वह (बीजेपी) भले ही कहते कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हों, लेकिन मैं कभी नहीं चाहूंगा बीजेपी मुक्त भारत,  क्योंकि उन्होंने बीजेपी से काफी कुछ सीखा है।

जब कांग्रेस के नेता बोलते है तो उनको कुछ पता नही चलता कि वो किस और जा रहे हैं।  बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के पुत्र की कंपनी के कारोबार में भारी बढ़ोत्तरी से जुड़ी खबर के सामने आने के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ‘बेटी बचाओ’ से आगे बढ़ते हुए ‘बेटा बचाओ’ में बदल गई है। राहुल गांधी ने ट्विटर पर कहा, बेटी बचाओ से, बेटा बचाओ के रूप में आश्चर्यजनक बदलाव,’ उन्होंने शाह के पुत्र को ‘शाहजादा’ के रूप में संबोधित किया।

अब बात करते हैं अमेठी दौरे की तो अमेठी दौरे पर राहुल गांधी ने कठौरा गांव में चौपाल लगाई।  राहुल ने कहा, ‘दो मुद्दे हैं हिंदुस्तान में- किसान और रोजगार का मसला,  इनका समाधान सरकार को करना चाहिए। मोदी जी (इनका समाधान) नहीं कर सकते तो कह दें कि वह नहीं कर सकते। कहें कांग्रेस पार्टी आ जाए और वो मेरा काम कर दे तो हम वो काम छह महीने के अंदर करके दिखा देंगे।


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