पीएम नरेंद्र मोदी की एक आवाज पर अब तक 10 लाख से ज्यादा लोगों ने एलपीजी सब्सिडी छोड़ दी है। इतना ही नहीं, देश भर में करीब 25,000 लोग रोज गिव इट अप कैंपेन में शामिल हो रहे हैं।

बिजनसलाइन में छपी खबर के मुताबिक, पीएम मोदी द्वारा 27 मार्च को गिवइटअप कैंपेन लॉन्च करने के बाद से 10 लाख 16 हजार लोगों ने सब्सिडी लेनी बंद कर दी है। इसका नतीजा यह हुआ है कि सब्सिडी के 476 करोड़ रुपये बच गए।

इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के ऐग्जिक्युटिव डायरेक्टर और ब्रैंडिंग ऐंड कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशंस हेड इंद्रजीत बोस ने बताया, “गिवइटअफ कैंपेन गति पकड़ रहा है। बड़ी तादाद में लोग आगे आ रहे हैं और यह बेहद उत्साहजनक है। पिछले 2-3 दिनों में ही आईओसी ने देखा कि रोज करीब 25,000 लोग सब्सिडी छोड़ रहे हैं।”

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भले 15.3 करोड़ के मौजूदा एलपीजी कनेक्शंस को देखते हुए सब्सिडी छोड़ने वालों की तादाद बहुत कम दिखे, लेकिन हकीकत यह है कि इनमें तेजी से वृद्धि हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक, सब्सिडी छोड़ने वाले एलपीजी ग्राहकों की संख्या के लिहाज से उत्तर प्रदेश टॉप पर है। राज्य के दो लाख कंज्यूमर सब्सिडी छोड़ चुके हैं। उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र का नंबर आता है, जहां 1.55 लाख और फिर दिल्ली में 10 जुलाई, 2015 तक 1.14 लाख लोगों ने सब्सिडी छोड़ी है। संयोगवश एलपीजी कनेक्शनों के मामले में भी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र देश में अव्वल हैं। एक हैरतअंगेज आंकड़ा केरल का है, जो एक डिवेलप्ड स्टेट है। फिर भी यहां के महज 15,030 लोगों ने ही अब तक एलपीजी सब्सिडी लेना बंद किया है। दक्षिणी राज्यों में कर्नाटक सब्सिडी छोड़ने के मामले में सबसे अव्वल है। अब तक यहां के 78, 307 लोगों ने सब्सिडी छोड़ दी है। उसके बाद तमिलनाडु 67, 096 लोगों, आंध्र प्रदेश 31, 711 लोगों और तेलंगाना 22, 645 लोगों के साथ क्रमशः दूसरे, तीसरे और चौथे नंबर पर है। वहीं, कंपनी के लिहाज से आईओसी के 4.46 लाख, जबकि भारत पेट्रोलियम के 2.82 लाख और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के 2.86 लाख ग्राहकों ने सब्सिडी छोड़ी है।

गिवइटअप पोर्टल पर सब्सिडी छोड़ चुके ग्राहकों के नाम भी छापे जाते हैं। साल 2014-15 में ऑयल कंपनियों ने 36, 580 करोड़ रुपये एलपीजी सब्सिडी पर खर्च किए थे। बहरहाल, अगर आप भी एलपीजी सब्सिडी छोड़कर देश के विकास में अपनी भागीदारी निभाने की तमन्ना रखते हैं, तो http://www.mylpg.in/#give_up_form पर जाकर ऐसा कर सकते हैं।

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