कोलकाता में एक मठ को फिर से शुरू करने के लिए चीन के मंदिर आगे आये हैं। जी हाँ चीन के दो प्रमुख बौद्ध मंदिर कोलकाता के इस मठ के नवीनीकरण के अलावा यहां अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी काम करेंगे।

इस मठ के निर्माण के साथ ही कम्युनिस्ट चीन दोनों देशों के बीच धार्मिक संबंधों की एक नई परंपरा भी शुरू कर रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए चीन पहले कदम के तौर पर चौबारा स्थित ह्यून सांग मठ का जीर्णोद्धार पहले ही हो चुका है।

इस मौके पर कार्यक्रम में झेजियांग प्रांत में चीन के लिंगिन मंदिर के भिक्षुओं ने प्रतीकात्मक चाय समारोह का आयोजन किया और शहर में उतरकर दोनों देशों के बीच संबंधों के एक नए युग की शुरुआत की।

आपको बता दें पहली बार ऐसा है कि चीन और चीन के दूतावास, कम्युनिस्ट पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) के प्रतिनिधि, भारत के किसी शहर में धार्मिक कार्य के लिए धन जुटाने में मदद कर रहे हैं।

कम्युनिस्ट होने के बावजूद कई चीन का मत आज धर्म के अभ्यास को लेकर पहले से ज्यादा स्पष्ट है। वह अपने लोगों को व्यक्तिगत पसंद के मामले में अपने धार्मिक विश्वास का पालन करने की अनुमति देता है।
(भाषा से इनपुट)

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