अद्भुत गाँव: महाराष्ट्र का ऐसा गाँव,जहाँ बिन दरवाजे के घर में चोरी करने से डरते हैं चोर

without-door home

आज की दुनिया में जहाँ लोग सुरक्षित नहीं हैं।तो घर कैसे सुरक्षित हो सकते हैं।आए दिन चोरी की घटनाएं आम हैं। यही वजह है कि लोग अब चोरी की घटनाओं से निजात पाने के लिए न केवल सीसीटीवी कैमरे लगवाते हैं, बल्कि सुरक्षा गार्ड्स की सेवाएं भी लेते हैं।

चोरी की घटनाओं से परेशान लोग सुरक्षा के नये उपाय करते हैं  वहीं देश में एक ऐसी भी जगह है जहां सुरक्षा के दृष्टि से घरों में ताले तक नहीं लगाए जाते हैं। जी हां, आपने सही पढ़ा , इस गांव की खासियत हैं कि आज तक यहां एक भी चोरी की घटना सामने नहीं आई है।यहां तक कि इस गांव के घरों में मुख्य दरवाजे नहीं होते।

महाराष्ट्र के इस छोटे से गांव में आज भी लोग आस्था और विश्वास के भरोसे अपने घरों, गाडियों, कीमती सामानों को बिना किसी दरवाजे के खुला रख कहीं भी चले जाते है।आखिर इसका कारण क्या है?

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एक बार इस गांव में बाढ़ आ गई, पानी का स्तर इतना ज्यादा था कि सब कुछ डूबने लगा। लोगों का कहना है कि उस भयंकर बाढ़ के दौरान कोई अनोखी प्रतिमा पानी में बह रही थी। जब पानी का स्तर थोड़ा कम हुआ तो एक व्यक्ति ने पेड़ की झाड़ पर एक बड़ा सा पत्थर देखा। इतना बड़ा पत्थर उसने आज तक नहीं देखा था, तो उसने उस पत्थर को पेड़ से उतारा और उसे तोड़ने के लिए जैसे ही उसमें कुल्हाड़ी मारी उस पत्थर में से खून बहने लगा।

मिला चमत्कारी पत्थर  यह देखकर वह वहां से भाग खड़ा हुआ और गांव लौटकर उसने सभी को यह बात बताई। सभी दुबारा उस स्थान पर पहुंचे जहां वह पत्थर था, सभी उसे देख भौंचक्के रह गए। और वह सोच नही पा रहे थे कि आखिर इस चमत्कारी पत्थर का क्या करें। इसलिए उन्होंने गांव वापस लौटकर अगले दिन फिर आने का फैसला किया।

उसी रात गांव के एक शख्स के सपने में भगवान शनि आए और बोले “मैं शनि देव हूं, जो पत्थर तुम्हें आज मिला उसे अपने गांव में लाओ और मुझे स्थापित करो” पत्थर अपनी जगह से एक इंच भी ना हिला अगली सुबह होते ही उस शख्स ने गांव वालों को सारी बात बताई, जिसके बाद सभी उस पत्थर को उठाने के लिए वापस लौटे। बहुत से लोगों ने प्रयास किया, किंतु वह पत्थर अपनी जगह से एक इंच भी ना हिला।

काफी कोशिश करने के बाद गांव वालों ने यह विचार बनाया कि वापस लौट चलते हैं और कल पत्थर को उठाने के एक नए तरीके के साथ आएंगे। उस रात फिर से शनि देव उस शख्स के स्वप्न में आए और उन्होंने बताया कि “मैं उस स्थान से तभी हिलूंगा जब मुझे उठाने वाले लोग सगे मामा-भांजा के रिश्ते के होंगे” तभी से यह मान्यता है कि इस मंदिर में यदि मामा-भांजा दर्शन करने जाएं तो अधिक फायदा होता है।

इसके बाद पत्थर को उठाकर एक बड़े से मैदान में सूर्य की रोशनी के तले स्थापित किया गया। जहाँ दर्शन के लिए लोग देश विदेश से आने लगे। आज तक नही हुई कोई चोरी और न ही कोई अपराध माना जाता है कि शनिशिंगणापुर गांव में आज तक कोई चोरी नहीं हुई और ना ही कोई अपराध कभी सुनने में आया।

महाराष्ट्र के शिगंणापुर नामक गांव में शनिदेव का मंदिर स्थित है। यह मंदिर महाराष्ट्र के अहमदनगर से लगभग 35 कि.मी. की दूरी पर है। यहां शनिदेव की प्रतिमा खुले आसमान के नीचे विराजमान हैं। गांव में लगभग तीन हजार जनसंख्या है पर किसी भी घर में दरवाजा नहीं है। कहीं भी कुंडी तथा कड़ी लगाकर ताला नहीं लगाया जाता।

shni dev mndir road

यह आस्था ही है कि लोग अपने घरों में दरवाजे नहीं लगाते। और यही आस्था है कि यहां चोरी की घटनाएं नहीं होती हैं शनि का प्रताप यहां ऐसा है कि आज तक यहाँ पर कभी चोरी नहीं हुई। यहाँ आने वाले भक्त भी अपने वाहनों में ताला नहीं लगाते। फिर भी कभी किसी वाहन की चोरी नहीं हुई।

गांववालों का मानना है कि शनिदेव स्वयं यहाँ विराजते है इसलिए यहां चोरी करने का दुस्साहस कोर्इ नही कर सकता। आज तक यहाँ ऐसी कोर्इ घटना नहीं हुर्इ है। प्राचीन समय से चली आ रही गांव की इस अदभुत परंपरा आज भी बिना किसी बदलाव के यहां निभार्इ जा रही है ।


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