इंडियन करंसी को लेकर एक चौंकाने वाली स्टडी सामने आई है। 10, 20 और 100 के नोट पर खतरनाक वायरस मिले हैं।

भारतीय वैज्ञानिकों के एक पैनल द्वारा की गई एक विशेष स्टडी में नोटों पर एंटीबायोटिक प्रतिरोधक जीन पाया गया है। नोटों पर बैक्टीरिया और वायरस भी पाए गए हैं। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के साथ मिलकर इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक्स और इंटीग्रेटिव बायोलॉजी के वैज्ञानिकों ने इस स्टडी पर काम किया है। रिपोर्ट में अलर्ट जारी किया है कि करंसी नोट पर मिले फंगस और प्रोटोजोआ से इन्फेक्शन हो सकता है।

 वैज्ञानिकों ने स्टडी के लिए 10, 20 और 100 के नोटों का इस्तेमाल किया था। इसमें वैज्ञानिकों ने “a shotgun metagenome sequencing approach” तकनीक का सहारा लिया है। वैज्ञानिकों की यह नई पद्धति रोगाणुओं की पहचान करने में कारगर साबित हुई। इससे जटिल डेटा इकट्ठा करने में मदद मिली।

कितना खतरनाक है ये वायरस

रिपोर्ट के मुताबिक, नोट पर 70 फीसदी यूकेरियोटा यानी फफूंद और प्रोटोजोआ मिला। इन नोटों पर 9 फीसदी बैक्टीरिया मिला। एक फीसदी से कम वह वायरस मिला, जो जीव कोशिकाओं को नष्ट करता है। रिपोर्ट में पाया गया कि नोटों की पतली सतह पर यह वायरस आसानी से सेटल हो जाते हैं। पतली कागज पर चिपककर वह लंबे समय तक इस पर बने रह सकते हैं। जो इन्हें इस्तेमाल करने वालों के लिए खतरनाक है। डॉक्टरी भाषा में कहें तो इससे लोगों को जान तक का खतरा हो सकता है।

कहां से लिए गए नोट

स्टडी के लिए सभी नोट ग्रॉसरी शॉप्स, केमिस्ट शॉप्स, स्नैक्स बार, हार्डवेयर शॉप और स्ट्रीट वेंडर से लिए गए। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये वो जगह हैं जहां करेंसी का रोजाना सबसे ज्यादा आदान-प्रदान होता है। यहां नोट कई हाथों से गुजरने के बाद इन वेंडर्स तक पहुंचते हैं। इसलिए इन नोटोंं पर स्टडी करना आसान था।

नोट के प्रचलन पर निर्भर करती है वायरस की संख्या

रिपोर्ट के मुताबिक, बैक्टीरिया और वायरस की संख्या इस बात पर निर्भर करती है कि वह नोट कितने समय से प्रचलन में है। नोट जितना गला और पुराना होगा, उसके इन्फेक्टेड होने की संभावना उतनी अधिक होगी।

इस समय भारत सहित दुनिया के कई अन्य देश इस स्टडी पर काम कर रहे हैं कि नोट कितने संक्रमित हैं। 2014 में प्रकाशित जनरल ऑफ रिसर्च इन बायोलॉजी की एक रिपोर्ट में भी भारतीय करेंसी में पैथोजेनिक बैक्टीरिया पाए गए थे। इस रिपोर्ट के मुताबिक, मीट शॉप और फूड सेलर्स के अलावा बैंक, हॉस्पिटल, म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में जो नोट चलन में आते हैं वो भी ज्यादा संक्रमित होते हैं।

किस देश के नोटों का क्या हाल

पिछले साल भी नोटों पर की गई इसी तरह की स्टडी जर्नल पीर-रिव्यूड में प्रकाशित की गई थी। इस स्टडी में यह समझने की कोशिश की गई थी कि दुनियाभर में किस देश के नोट ज्यादा संक्रमित हैं। रिपोर्ट के मुताबिक फिलिस्तीन के नोट 96.25 फीसदी, कोलंबिया 91.1 फीसदी, साउथ अफ्रीका के 90 फीसदी, सउदी अरब के 88 फीसदी और मैक्सिको के 69 फीसदी नोट संक्रमित हैं।

क्या है उपाय?

वैज्ञानिकों का मानना है कि नोटों से फैलने वाले संक्रमण को रोकने के लिए प्लास्टिक करंसी का इस्तेमाल करना होगा। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूके में प्लास्टिक करंसी चलन में है। प्लास्टिक करंसी जल्दी से गलती नहीं है और उससे संक्रमण को हटाया जा सकता है। वहीं, नोटों के प्रचलन को कम कर क्रेडिट और डेबिट कार्ड का ज्यादा इस्तेमाल भी संक्रमण से बचा सकता है। क्रेडिट और डेबिट कार्ड ज्यादा लोगों के हाथों से नहीं गुजरता, इसलिए उनमें संक्रमण की संभावना कम है।

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