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रक्षा बंधन का शाब्दिक अर्थ हुआ रक्षा का बंधन। भाई और बहन इस दिन एकदूसरे के प्रति अपने परस्पर प्रेम को प्रदर्शित करते हैं। भाई अपनी बहन को हर मुश्किल परिस्थिति में रक्षा करने और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचाने का वचन देता है। बहनें अपने भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं।

महान ऐतिहासिक ग्रंथ महाभारत के मुताबिक एक बार भगवान कृष्णपांडवों के साथ पतंग उड़ा रहे थे। उस समय धागे की वजह से उनकी अंगुली कट गई। तब द्रोपदी ने बहते खून को रोकने के लिए अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी अंगुली पर बांधा था।

भगवान कृष्ण द्रोपदी के इस प्रेम से भावुक हो गए और उन्होंने आजीवन सुरक्षा का वचन दिया। यह माना जाता है कि चीर हरण के वक्त जब कौरव राजसभा में द्रोपदी की साड़ी उतार रहे थेतब कृष्ण ने उस छोटे से कपड़े को इतना बड़ा बना दिया था कि कौरव उसे खोल नहीं पाए।

भाई और बहन के प्रतीक रक्षा बंधन से जुड़ी एक अन्य रोचक कहानी हैमौत के देवता भगवान यम और यमुना नदी की। पौराणिक कथाओं के मुताबिक यमुना ने एक बार भगवान यम की कलाई पर धागा बांधा था। वह बहन के तौर पर भाई के प्रति अपने प्रेम का इजहार करना चाहती थी।

भगवान यम इस बात से इतने प्रभावित हुए कि यमुना की सुरक्षा का वचन देने के साथ ही उन्होंने अमरता का वरदान भी दे दिया। साथ ही उन्होंने यह भी वचन दिया कि जो भाई अपनी बहन की मदद करेगाउसे वह लंबी आयु का वरदान देंगे।

यह भी माना जाता है कि भगवान गणेश के बेटे शुभ और लाभ एक बहन चाहते थे। तब भगवान गणेश ने यज्ञ वेदी से संतोषी मां का आह्वान किया। रक्षा बंधन को शुभलाभ और संतोषी मां के दिव्य रिश्ते की याद में भी मनाया जाता है।

राखी को बड़े उत्साह के साथ इस तरह मनाया जाता हैः

बहनें अपने भाइयों के लिए पसंदीदा राखियां खरीदने के लिए काफी पहले से तैयारी करती हैं। कई बहनें अपने से दूर रह रहे भाइयों को पोस्ट के जरिए राखी भेजती हैं। भाई भी बहनों के लिए उपहार तलाशना शुरू कर देते हैं। यह इस बात पर निर्भर करता है कि उनके पास कितने पैसे हैं और उनका बजट क्या है।

इंटरनेट के इस जमाने मेंऑनलाइन स्टोर से सीधे राखी और उपहार भेजने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है। कुछ तो वास्तविक राखियों के स्थान पर वर्चुअल राखियां देने की भी सोचते हैं।

राखी के दिन हर घर में उत्साह का माहौल रहता है। पूरा परिवार एकजुट होता है। परिवार के सदस्य नए कपड़े पहनते हैं। महिलाएं और लड़कियां अपनी हथेलियों पर मेहंदी लगवाती हैं। मिठाइयां बनती हैं और बहुत ख़ुशी का माहौल होता है। 

घर के देवीदेवताओं की पूजा करने के बाद बहनें अपने भाई की आरती उतारती हैं। तिलक और चावल माथे पर लगाती हैं। बदले में भाई जिंदगी भर सुरक्षा का वचन देने के साथ ही उपहार भी बहनों को देते हैं।

 

आजादी के बाद रवींद्र नाथ ठाकुर ने शांति निकेतन में राखी महोत्सव का आयोजन किया। वे पूरे विश्व में बंधुत्व और सहअस्तित्व की भावना जगाना चाहते थे। यहां राखी मानवीय संबंधों में सद्भाव का प्रतीक है।

सशस्त्र सेनाओं को भी इस दिन नहीं भूलाया जा सकता। वर्दी वाले यह जवान हमारी सीमाओं की रक्षा करते हैं ताकि हम यहां आराम से सुरक्षित रह सके। इस दिन सीमाई इलाकों के पास रहने वाले लोग बड़े पैमाने पर सशस्त्र सेनाओं से मिलने जाते हैं। सिपाहियों की कलाइयों पर राखी बांधते हैं।

राखी की आधुनिक अवधारणा

रक्षा बंधन अब खून के रिश्तों तक सीमित नहीं हैजो भाई और बहन के बीच ही रहे। आजबहनें भी एकदूसरे को राखी बांधकर एकदूसरे को जीवनभर प्रेम और रक्षा करने का वचन देती हैं। दोस्त भी इस त्योहार को मनाने लगे हैं। आपसी रिश्ते को मजबूती देने और एकदूसरे के प्रति अपने अहसास बताने के लिए। आज रक्षा बंधन एक व्यापक नजरिये को प्रस्तुत करता है। जीवनभर नैतिकसांस्कृतिक और अध्यात्मिक मूल्य भी इसमें शामिल हैं।

कोई भी रिश्ता किसी खास दिन या उत्सव का मोहताज नहीं होता। लेकिन त्योहार और खास दिन ही हमारी रोजमर्रा की बोरियत भरी जिंदगी से दूर करते हुए हमें आपसी रिश्तों और प्रेम के प्रतीक इन त्योहारों को मनाने को प्रेरित करते हैं। हम यहां हर एक को विश्व बंधुत्व और प्रेम को अभिव्यक्त करना चाहते हैं। हैप्पी रक्षा बंधन!!!

 

 

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